सारणी। भारतीय सनातन सदग्रंथ श्रीरामचरितमानस मनुष्य को जीवन जीने की पद्धति सिखाता है। हम मानस को चाहे जितनी बार भी पढ़ते हैं, हमेशा हमें कुछ नया प्राप्त होता है और आनंद भी बढ़ता जाता है।
उक्त बातें बैतूल के सारनी में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के पांचवें दिन पूज्य प्रेमभूषण जी महाराज ने व्यासपीठ से कथा वाचन करते हुए उक्त बातें कहीं। 
श्री रामकथा के माध्यम से भारतीय और पूरी दुनिया के सनातन समाज में अलख जगाने के लिए सुप्रसिद्ध कथावाचक प्रेमभूषण जी महाराज ने कहा कि मनुष्य के जीवन में धर्म को केंद्र में रखा होना चाहिए। परंतु चिंता का विषय यह है कि मनुष्य जितना ही ऊपर की और खासकर के आर्थिक क्षेत्र में ऊपर की ओर जाता है वह धर्म से दूर होता चला जाता है यह चिंतनीय विषय है।
यही कारण है कि भगवान के से नजदीकी निम्न आय वर्ग के लोगों की अधिक से अधिक रहती है।  इसका प्रमाण  श्री राम कथा के माध्यम से भी दिया जा सकता है।  हमारे सनातन सद ग्रंथ यही बताते हैं कि कथा में रुचि उसी की हो पाती है जिसके ऊपर भगवान की अतिशय कृपा होती है। अब आप देखें कथा पंडाल में कथा श्रवण के लिए नित्य आने वाले लोगों में से अधिकांश किस आय वर्ग के लोग होते हैं या किस तरह के पदों पर कार्यरत लोग होते हैं।
महाराज श्री ने कहा कि परमार्थ कार्य से किया जाने वाला हर कार्य यज्ञ के समान माना गया है कथा करना कराना भी एक यज्ञ ही है। जिस किसी भी कार्य में मैं का लोप हो जाता है और  परहित के भावना सम्मिलित होती है वह कार्य यज्ञ के समान ही माना गया है।
महाराज श्री ने कहा कि आज दुनिया में हर व्यक्ति किसी न किसी चिंता और सोच में पड़ा हुआ दिखाई देता है जबकि सनातन शास्त्र यही बताते हैं कि वही व्यक्ति सुखी है जो शांत है और बिल्कुल भगवान में रमा हुआ है। पूज्यश्री ने कहा कि स्थान पर रहने का प्रयास भी व्यक्ति को अशांत करता है। इसलिए सदा शांत रहने का अभ्यास होना चाहिए भगवान भोलेनाथ की ही तरह।
हर व्यक्ति को यह पता है कि अगर वह चोरी करेगा तो उसकी सजा होगी वह गलत करेगा तो भी उसकी सजा होगी।  फिर भी हर साल हम देखते हैं कि कई नकली बाबा पकड़े जाते हैं, कहीं नकली आईएएस भी पकड़े जाते हैं। उन्हें सजा भी होती है। इसलिए जो जैसा करेगा उसका फल भुगतने के लिए तैयार रहे। अगर आप फल खाने के लिए तैयार हैं तो आप कुछ भी करिए हमें क्या पड़ी है।
धनुष भंग प्रसंग सुनने के लिय बड़ी संख्या में विशिष्ट जन उपस्थित रहे। हजारों की संख्या में उपस्थित श्रोता गण को महाराज जी के द्वारा गाए गए दर्जनों भजनों पर झूमते हुए देखा गया।

By Vishal

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