ज्योतिरादित्य सिंधिया का कांग्रेस छोड़ने से काग्रेस का वर्तमान के साथ भविष्य भी अंधकारमय
सारनी। भाजपा नेता प्रकाश शिवहरे ने बताया कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ भाजपा में आने पर विधवा अलाप अलाप रहे कांग्रेसी इसका जवाब दे। जब इंदिरा गांधी के इशारे पर सीएम समेत पूरी कैबिनेट ने बदल ली थी पार्टी? ये वाक्या है सन 1980 हरियाणा का जब इंदिरा गांधी के दबाव में हरियाणा में जनता दल की निर्वाचित सरकार ने दल बदल कर कांग्रेस की सरकार बनाई थी। जी हॉ 1977 में जब कांग्रेस का सफाया हो गया था। शक्तिशाली प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी सांसद का चूनाव हार गई थी। राज्यों से भी कांग्रेस सरकार की विदाई हो रही थी। 1977 में हरियाणा में देवी लाल के नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार बनी थी जनता पार्टी में टूट के बीच भजनलाल हरियाणा के मुख्यमंत्री बन गए थे। जनता पार्टी मे फूट हो चुकी थी इसी बीच सन1980 के लोकसभा चुनाव में इंदिरा गांधी की जबर्दस्त वापसी हुई। कांग्रेस को 353 सीटें मिलीं और इंदिरा गांधी दोबारा देश की प्रधानमंत्री बनी। दोबारा प्रधानमंत्री बनते ही इंदिरा गांधी ने बदले की राजनीति शुरू कर दी। जिन राज्यों में गैर कांग्रेसी सरकारें थीं उन्हें बर्खास्त किया जाने लगा। उस समय हरियाणा में जनता पार्टी की सरकार थी और मुख्यमंत्री थे भजन लाल। कांग्रेस जिस तरह देश में गैर कांग्रेसी सरकारों को बरखास्त कर रही थी। उससे भजनलाल डर गये। वे किसी भी कीमत पर सरकार बचाये रखना चाहते थे। तब भजनलाल ने एक आश्चर्यचकित करने वाला फैसला लिया। मुख्यमंत्री भजनलाल 37 विधायकों के साथ कांग्रेस में शामिल हो गये। जब सुबह हुई तो हरियाणा में कांग्रेस की सरकार बन चुकी थी। रातों-रात जनता पार्टी सरकार का वजूद खत्म हो गया।
भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि किसी मुख्यमंत्री ने अपने मंत्रियों समेत ही पार्टी बदल ली। अब प्रश्न यह उठता है कि जब बोया पेड़ बबूल का तो आम कहां से होए | जो तख्तापलट की राजनीति कांग्रेस ने अपने दौर में की वहीं आज कांग्रेश के साथ हो रही है। भाजपा के हुए ज्योतिरादित्य लेकिन सिंधिया खानदान का भाजपा से पहले ही रहा है विशेष संबंध रहा है। राजमाता सिंधिया भारतीय जनसंघ से लेकर भारतीय जनता पार्टी की संस्थापक सदस्य रही है। और राजमाता सिंधिया से लेकर माधवराव सिंधिया जनसंघ के सांसद रह चुके हैं। वसुंधरा राजे सिंधिया, यशोधरा राजे सिंधिया पहले ही भाजपा के सक्रिय पदाधिकारी है। इस बीच जब ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने अपमान से आहत होकर स्वाभिमान की आवाज पर भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता लेते हो तो कांग्रेस के नेता विधवा अलाप अलापने लग जाते हैं। क्योंकि ज्योतिरादित्य के जाने से कांग्रेश के वर्तमान के साथ-साथ भविष्य भी अंधकारमय होने की पूरी संभावना है। उनके समर्थक भी सरकार से इस्तीफा दे चुके हैं पर कमलनाथ जी अपनी सरकार को अनाथ होता देख विचलित हो रहे हैं। जिससे उनकी तबादला एक्सप्रेस पूरी रफ्तार से चल रही है। अल्पमत की सरकार सतत संवैधानिक पदों पर नियुक्तियां कर रही है। जोकि असंवैधानिक और अनैतिक करते हैं अगर वास्तव में कमलनाथ जी के पास बहुमत है तो वहां सदन में बहुमत सिद्ध क्यों नहीं कर रहे। विधानसभा से कोरोना का बहाना बताकर विश्वास मत से भागना यह बताता है कि कमलनाथ सरकार सदन में विश्वास मत हो चुकी है।15 महीने की कार्य प्रणाली से कमलनाथ सरकार जनता के बीच भी अपना विश्वास खो चुकी है। पूरा मामला देश के सर्वोच्च न्यायालय और महामहिम राज्यपाल महोदय की निगरानी में कमलनाथ जी कितना भी विधानसभा से भागने का प्रयास करें वह सफल नहीं हो पाएंगे। उन्हें विधानसभा में विश्वास मत हासिल करना ही होगा।
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