
बैतूल/सारनी। सतपुडा पावर प्लांट के स्क्रैप हेराफरी मामले में जबलपुर की सात सदस्य टीम ने जांच कर वापस लौट गई है। लेकिन मामले में मुख्य अभियंता व्दारा गलत कार्रवाई करने की बात को लेकर अब शिकायत मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान,ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर,ऊर्जा सचिव,एमडी तक जा पहुंची है। इस मामले में भाजपा झुग्गी झोपड़ी प्रकोष्ठ के प्रदेश सह संयोजक एवं विधायक प्रतिनिधि रंजीत सिंह ने भी मोर्चा खोल सीएचपी तौल कांटा प्रभारी आईआर खान पर कार्रवाई का निलबंत करने की मांग की थी। जिसके बाद ऊर्जा सचिव के निर्देश पर सीएचपी के तौल कांटा प्रभारी सहायक अभियंता आईआर खान एवं एई मनीष झा को भी निलंबित करने की कार्रवाई कर दी गई है। क्योंकि पूर्व में भी सीएचपी के तौल कांटा प्रभारी आईआर खान स्क्रैप हेराफेरी के मामले में ही कुछ साल पहले बिरसिंहपुर ट्रांसफर हो चुके थे। उसके फिर अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर वापस सतपुड़ा पावर प्लांट मैं उसी सीएचपी के तौल कांटा का प्रभार लिया जहां पर उन्होंने पहले गड़बड़ी की थी। भाजपा का इस मामले में विरोध करने के बाद अब मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी इंजीनियर सुनील सरियाम पर कोई निलंबन की कार्रवाई को लेकर खुलेआम भाजपा,कांग्रेस और आप पार्टी विरोध करती नजर आ रही है। और तो और ठेका मजदूर संघ के पदाधिकारी भी इस मामले में विरोधकर आंदोलन की तैयारी बना रहे हैं। क्योंकि सुनील सरियाम एक ऐसे शख्स है जो अपनी जन सेवा के लिए पूरे जिले में जाने जाते हैं। उनके ऐसे बहुत से किसे हैं जो जिसके लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया है। कोई भी व्यक्ति इस बात को मानने को नहीं तैयार हो रहा है कि सुनील सरियाम से इतनी बड़ी चूक हो सकती है। कहीं ना कहीं यह भी प्रतीत होने लगा है कि सुनील सरियाम की छवि को खराब करने के लिए यह पूरा षडयंत्र रचा गया है। जबकि सतपुड़ा पावर प्लांट के मुख्य अभियंता ने वीके कैथवार ने जल्दबाजी में स्टोर के इंजीनियर सहित चार कर्मचारियों को निलंबित कर दिया। लेकिन सवाल तो यह उठता है कि जब तौल काटा पर हेराफेरी करने के कारण 29 टन स्क्रैप को वजन कर बिल्टी में नौ टन बताया गया। और इसी वजन के बाद ही स्टोर के इंजीनियर सुनील सरियाम ने बिल्टी पर हस्ताक्षर किया। इंजीनियर को तो यह तक नहीं पता था की सीएचपी तौल कांटे पर इतना बड़ा खेल हो रहा है। जब तौल कांटे पर इतनी बड़ी गलती हुई तो फिर क्या ऐसे में तौल कांटा प्रभारी सहित तौल कांटे पर पदस्थ सभी कर्मचारियों पर निलंबन की कार्रवाई करना था। लेकिन मुख्य अभियंता व्हीके कैथवार ने जल्दबाजी में इतनी जल्दी मचा दी कि अपने अधीनस्थ अधिकारियों को बचाकर छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर दी। कहीं यही कार्रवाई मुख्य अभियंता के लिए जी का जंजाल ना बन जाए। क्योंकि अगर इस कार्रवाई के बाद कोई बड़ा आंदोलन रूप लेता है तो कहीं ना कहीं इसकी गाज मुख्य अभियंता पर भी गिर सकती है। और जांचों में भी स्पष्ट हो चुका है कि सारी गलती तौल कांट पर हुई है तो ऐसे में इंजीनियर सुनील सरियाम का निलंबन वापस कर उन्हें कार्य पर वापस बुलाया किया जाना चाहिए। और सबसे बड़ी बात एक आम व्यक्ति सतपुड़ा पावर प्लांट में प्रवेश करने के लिए अनुमति एवं गेटपास लेना पड़ता है। लेकिन बेंगलुरु एवं कर्नाटका से आए मजदूर बिना किसी पुलिस वेरिफिकेशन के प्लांट के अंदर बेधड़क आना-जाना कर रहे हैं। जो नियमों के विरुद्ध है। कहीं ना कहीं प्लांट में घटित हो रहे मामलों में इस मामले में भी कार्रवाई की जानी चाहिए। वही पुलिस को भी इस मामले में गंभीरता से लेते हुए मजदूरों का परीक्षण कराया जाना चाहिए ताकि किसी तरह की कोई भी अपराधिक गतिविधियां संचालित हो सके। जबकि इस मामले में स्क्रैप भरकर ले जा रहे ड्राइवर और क्लीनर के साथ कंपनी के ठेकेदार की मिलीभगत में सीएचपी के तौल काटें के कर्मचारियों के साथ होने की बात सामने आ चुकी है। तो फिर मुख्य अभियंता को इस मामले में भी कहीं ना कहीं संबंधित ठेका कंपनी को ब्लैक लिस्टेड कर अभी तक जितना भी स्क्रैप का सामान स्टोर से उठाया है उस लागत की रिकवरी करनी चाहिए। ताकि एक संदेश जाएगी गलत काम करने वालों के साथ सख्ती कार्रवाई ही होता है। और दोबारा सतपुडा पावर प्लांट में काम करने का मौका ना मिले। सवाल यह भी उठता है कि गेट पास बिना वेरिफिकेशन के बन कैसे रहें? कहीं ना कहीं प्लांट का सुरक्षा विभाग सवालिया घेरे में आ रहा है। इतनी बड़ी चूक कहीं ना कहीं किसी खतरे के अंदेशे की ओर संकेत कर रही है। स्क्रैप हेराफेरी के ऐसे दो मामले सामने आ चुके हैं जिस मामलों में सुरक्षा विभाग के अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।
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