संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार की पुण्यतिथि मनाई

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सारनी। विश्व के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्य दिन – प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। भारत के कोने-कोने में इसकी शाखाएँ हैं। इतना ही नहीं विश्व के अनेक देशों में किसी न किसी रूप में संघ का काम है। संघ के निर्माता डॉ.केशवराव बलिराम हेडगेवार का जन्म 1 अप्रैल 1889 (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, वि. सम्वत् 1946) को नागपुर में हुआ था। इनके पिता श्री बलिराम हेडगेवार तथा माता श्रीमती रेवतीवाई थीं। केशव जन्मजात देशभक्त थे। बचपन से ही उन्हें नगर में घूमते  हुए अंग्रेज सैनिक, सीताबर्डी के किले पर फहराता अंग्रेजों का झण्डा यूनियन जैक तथा विद्यालय में गाया जाने वाला गीत ‘गाॅड सेव दि किंग’ बहुत बुरा लगता था। उन्होंने एक बार सुरंग खोदकर उस झंडे को उतारने की योजना भी बनाई, पर बालपन की यह योजना सफल नहीं हो पाई।
वे सोचते थे कि इतने बड़े देश पर पहले मुगलों ने और फिर सात समुन्दर पार से आये अंग्रेजों ने अधिकार कैसे कर लिया? वे अपने अध्यापकों और अन्य बड़े लोगों से बार-बार यह प्रश्न पूछा करते थे। बहुत दिनों बाद उनकी समझ में यह आया कि भारत के रहने वाले हिन्दू असंगठित हैं। वे जाति, प्रान्त, भाषा, वर्ग, वर्ण आदि के नाम पर तो एकत्र हो जाते हैं, पर हिन्दू के नाम पर नहीं। भारत के राजाओं और जमीदारों में अपने वंश तथा राज्य का दुराभिमान तो है, पर देश का अभिमान नहीं। इसी कारण विदेशी आकर भारत को लूटते रहे और हम देखते रहे। यह सब सोचकर केशवराव ने स्वयं इस दिशा में कुछ काम करने का विचार किया। उन दिनों देश की आजादी के लिए सब लोग संघर्षरत थे। स्वाधीनता के प्रेमी केशवराव भी उसमें कूद पड़े। उन्होंने कोलकाता में मैडिकल की पढ़ाई करते समय क्रान्तिकारियों के साथ और वहाँ से नागपुर लौटकर कांग्रेस के साथ काम किया। इसके बाद भी उनके मन को शान्ति नहीं मिली। सब विषयों पर खूब चिन्तन और मनन कर उन्होंने नागपुर में 1925 की विजयादशमी पर हिन्दुओं को संगठित करने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की। डॉ. हेडगेवार द्वारा रोपा गया संघ रूपी पौधा वट वृक्ष बन गया है। उक्त विचार सतपुड़ा सरस्वती शिक्षा समिति के अध्यक्ष अंबादास सूने ने सरस्वती विद्या मंदिर में संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किए। इससे पूर्व कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने डॉ. हेडगेवार जी के चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। कार्यक्रम में दीपक रावत, मनीष चौहान, राहुल कदम, संतोष प्रजापति, योगेन्द्र ठाकुर, राजेंद्र तिवारी, धर्मेन्द्र वर्मा, सालकराम प्रजापति उपस्थित थे।

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