भारत भारती से जुड़ा है रामजन्मभूमि संघर्ष में बलिदानों का इतिहास

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  • शहीद राम कोठारी, शरद कोठारी रहे हैं भारत भारती के छात्र

बैतूल। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कल श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या में पूजन कर मंदिर निर्माण के कार्य का श्री गणेश करेंगे। कोरोना महामारी के कारण उनके साथ देश भर के कुछ चुनिन्दा लोग ही इस आयोजन के प्रत्यक्षदर्शी होंगे। उनमें एक नाम रामजन्मभूमि आंदोलन में शहीद हुए राम कोठारी और शरद कोठारी का परिवार भी है। बैतूलवासियों के लिये यह गर्व करने का दिन हैं कि जिनके बलिदानों के कारण आज राम की जन्मभूमि का निर्माण हो रहा है वे शहीद शरद और राम भारत भारती आवासीय विद्यालय, जामठी बैतूल के छात्र रहे हैं। राम कुमार कोठारी बड़ा था और शरद कुमार कोठारी उससे एक साल छोटा। पिताजी हीरालाल कोठारी और माताजी सुमित्रा देवी के दोनों पुत्र मानों राम-लक्ष्मण की जोड़ी।
दोनों का नाम भारत भारती विद्यालय बैतूल के स्कालर रजिस्टर में दर्ज है। तब आवासीय विद्यालय कम होने से देश भर के विद्यार्थी भारत भारती विद्याध्ययन के लिए आते थे। रामकुमार कोठारी का प्रवेश हुआ था 17 जुलाई 1973 को कक्षा पहली में और शरदकुमार आये थे उनके एक साल बाद 25 नवंबर 1974 को।
पता- श्री हीरालाल कोठारी
38 बी. के. पाल
एवेन्यू कलकत्ता -5

छात्र पंजी के अनुसार दोनों भाई कक्षा पाँचवी पास करके वापस कलकत्ता चले गए। बाल्यकाल में राष्ट्रभक्ति की घुट्टी मिल गई थी सो जल्दी ही संघ के स्वयंसेवक बन गए।
राम और शरद कोठारी नियमित रूप से कलकत्ता की बुराबार की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा में जाया करते थे। पढ़ाई के साथ-साथ दोनों भाइयों ने संघ का द्वितीय वर्ष का प्रशिक्षण भी प्राप्त कर लिया।
अयोध्या आंदोलन का समय आया। राम और शरद ने भी विहिप के कारसेवकों के तरह ही अयोध्या में राममंदिर के निर्माण में अपनी सेवा देने का फैसला किया। 20 अक्टूबर 1990 को उन्होंने अपने पिता हीरालाल कोठारी को अयोध्या यात्रा की योजना के बारे में बताया। पिताजी शुरू में दोनों के कारसेवा में जाने के इच्छुक नहीं थे। क्योंकि दिसम्बर में बड़ी बहिन पूर्णिमा का विवाह था। पर दोनों ने जिद्द पकड़ ली। पिताजी ने इस बात पर अनुमति दी कि वे घर पर रोज पत्र लिखेंगे।
22 अक्टूबर को दोनों भाई अयोध्या रवाना हो गए। मुलायम सरकार की घोषणा कि अयोध्या में परिन्दा भी पर नहीं मार सकता के कारण कारसेवकों को जगह-जगह रोक लिया। दोनों भाई अपने एक ओर साथी के साथ दो सौ किलोमीटर की पदयात्रा कर 30 अक्टूबर को अयोध्या पहुँच गए।
तीन दिन बाद, कार्तिक पूर्णिमा को कारसेवक हनुमानगढ़ी के पास इका हुए और उन्होंने विवादित ढांचे को दूर हटाने का फैसला किया। राम और शरद कोठारी के नेतृत्व में हनुमानगढ़ी में सैकड़ों कार सेवक इके हुए, तब पुलिस बल ने उन पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। 16 कारसेवक उसमे शहीद हुए। जिसमें राम और शरद भी थे। कोठारी बंधुओं के अंतिम संस्कार में पूरा बंगाल उमड़ पड़ा और दोनों बलिदानी भाइयो को छलकते नैनो से विदा किया। क्या आप विश्वास करेंगे 6 दिसम्बर 1992 को जब पवित्र श्री राम जन्मभूमि पर स्थित ढांचा ढहाया जा रहा था तो कोठारी बन्धुओ की माता सुमित्रा देवी और पिता हीरालाल जी भी अयोध्या में कारसेवा कर रहे थे। हमे गर्व है कि भारत भारती ने न केवल देश को अनेक डॉक्टर, इंजीनयर, व्यापारी, शिक्षक, कवि, समाजसेवी, किसान के साथ-साथ अनेक सैनिक दिए हैं जो देश सेवा कर रहे हैं तथा अपना बलिदान भी दिया हैं और इस विद्यालय से श्रीराम काज में बलिदान होने वाले राम-शरद जैसे बलिदानी निकले हैं।
मोहन नागर
सचिव
भारत भारती शिक्षा संस्थान।

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