पावर प्लांट प्रबंधन की बढ़ रही मुश्किलें, पॉल्यूशन कन्ट्रोल बोर्ड छिंदवाड़ा की टीम पहुँची सारनी

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सारनी। सतपुड़ा पावर प्लांट प्रबंधन द्वारा जलाशय में ऑइल बहाने के मामले में जांच करने हेतु शुक्रवार को पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की टीम सारनी पहुंची। प्राप्त जानकारी के अनुसार सब पूरा प्रबंधन द्वारा जलाशय में ऑइल बहाने की शिकायत पर 2 दिन पूर्व ही पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भोपाल एवं बैतूल की टीम अलग-अलग इस मामले में जांच कर रही है। जिसमें पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने कोल हैंडलिंग प्लांट से सतपुड़ा जलाशय तक निरीक्षण के पश्चात सैंपल लिए थे और सख्त रूप से पावर प्लांट प्रबंधन को साफ-सफाई करने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद सतपुड़ा पावर प्रबंधन ने जलाशय की दो दर्जन मजदूरों को नाव मुहैया कराकर सफाई कराना शुरू किया। पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की जांच अभी करने के 2 दिनों के बाद ही पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड द्वारा की 3 सदस्य टीम सारनी पहुंची और इस मामले में काफी गहराई से जांच कर रही है। आपको बता दें कि सतपुड़ा जलाशय में लापरवाही पूर्वक ऑयल बहाने की शिकायत पीपल फॉर एनिमल्स यूनिट के अध्यक्ष आदिल खान ने मध्य प्रदेश पावर जेनरेटिंग कंपनी लिमिटेड के एमडी एवं पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को की थी जिस शिकायत के बाद पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भोपाल, बैतूल की टीम एवं पॉल्यूशन कन्ट्रोल बोर्ड छिंदवाड़ा की टीम ने जांच की, जिस खबर को प्रमुखता से हमारे द्वारा प्रकाशित किया जा रहा हैं।

पक्षियों पर पड़ रहा असर

सतपुड़ा जलाशय के आसपास ठंड के समय से ही प्रवासी पक्षियों का डेरा रहता हैं, अभी फिलहाल समय में भी कई प्रजाति के पक्षी सतपुड़ा जलाशय के आस-पास रह रहे हैं और सतपुड़ा प्रबंधन के द्वारा छोड़े गए ऑयल जलाशय में तैरने की वजह से यह पक्षी अपनी मौत और जिंदगी के बीच जूझ रहे हैं। क्योंकि जलाशय में तैर रहे ऑयल के कारण पक्षियों के पंख गोते लगाते से ही चिपक जाते हैं जिससे वे उड़ान नहीं भर पा रहे हैं। ठीक ऐसा ही एक दृश्य आदिल ने देखा जिसके बाद पक्षियों को सतपुड़ा जलाशय से बाहर निकालकर उनका उपचार कराया साथ ही उक्त माध्यम से इस मामले की सूचना बैतूल डीएफओ को दी।

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