नवीन शिक्षा नीति आत्मनिर्भर भारत की ओर एक सशक्त कदम- एम.डी. वाघमारे

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शाहपुर ( अभिषेक राठौर )। विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन योजना के अंतर्गत शासकीय महाविद्यालय शाहपुर में  “राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में निहित रोजगारोन्मुखी प्रावधान”* विषय पर गुरुवार  को विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया । कार्यक्रम की भूमिका रखते हुए कैरियर मार्गदर्शन योजना प्रकोष्ठ प्रभारी प्रो. डॉ. शीतल चौधरी ने कहा कि नवीन राष्ट्रीय शिक्षा नीति न केवल नैतिकता एवं राष्ट्रीयता का बोध कराती है वरन प्राथमिक शिक्षा से ही व्यावसायिक शिक्षा का पोषण करने वाली है। उन्होंने बताया कि नवीन राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्थानीय शिल्पकार, मिट्टी व धातु के कलाकार, लकड़ी के कारीगर, उन्नत कृषक आदि को आमंत्रित कर शालेय शिक्षा में कक्षा 6 से 8 तक कम से कम 10 दिन का *’बैगलेस’* कालखंड लगाने पर जोर दिया गया है, यह एक अभिनव पहल है। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर एम.डी. वाघमारे ने इस विषय पर विचार रखते हुए बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 न केवल अतीत का विश्लेषण करती है बल्कि यह वर्तमान की रोजगार मूलक आवश्यकताओं को पूरा करते हुए भविष्य की संभावनाओं को भी ध्यान में रखकर बनाई गई नीति है। इसके भविष्य में आत्मनिर्भर भारत बनाने हेतु वृहद और परिवर्तनकारी परिणाम देखने को मिलेंगे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रो. डॉ. संजय बाणकर ने कहा कि आर्थिक रूप से देश को सशक्त बनाने के लिए नवीन शिक्षा नीति में कई उल्लेखनीय प्रावधान शामिल किए गए हैं ताकि स्कूली शिक्षा से ही स्वरोजगार एवं आत्मनिर्भरता के बीज विद्यार्थियों के मन में रोपित किए जा सके। डॉ. देवेंद्र कुमार रोडगे बताया कि नवीन शिक्षा नीति में नवीन आई टी आई की गुणवत्ता व संख्या बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है ताकि स्वरोजगार की दिशा में हमारी युवा पीढ़ी आगे बढ़ सके। डॉ. नितेश पाल द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों में नवीन व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की उपयोगिता, आवश्यकता एवं वैश्विक परिदृश्य के साथ कदम से कदम मिलाने वाले शिक्षा नीति के उल्लेखनीय बिंदुओं पर प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम के अंत में आभार प्रदर्शन प्रो. सचिन कुमार नागले द्वारा व्यक्त किया गया। इस विचार गोष्ठी में महाविद्यालय के प्रो. राकेश हनोते, प्रो. नीतू जायसवाल माहोरे, डॉ. ओम झा, प्रो. चंद्र किशोर वाघमारे, प्रो. पूनम देशमुख, प्रो. ज्योति वर्मा, सुश्री पवन सिजोरिया, प्रो.मीनाक्षी ठाकुर, प्रो. राजेंद्र ठाकुर ने भी अपने महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए।

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