- स्वयं सहायता समूह की महिलाएं गौ-काष्ठ बनाकर मोक्षधाम में कर रहीं हैं सप्लाई


बैतूल। जिले के विकासखंड चिचोली के ग्राम पंचायत देवपुर कोटमी के ग्राम सिपलई में आजीविका मिशन के अन्तर्गत संचालित सरस्वती आजीविका स्वयं सहायता समूह को मुख्यमंत्री गौ सेवा योजना के अंतर्गत शासन द्वारा गौवंश की देखरेख करने के लिये गौशाला का संचालन करने की जिम्मेवारी वर्ष 2020 में सौंपी गई। सरस्वती आजीविका स्वयं सहायता समूह में कुल 15 महिला सदस्य सम्मिलित हैं। समूह की महिलाएं कोरोना काल में गोबर से गौकाष्ठ, गोनाइल, धूपबत्ती, गोबर के दीये, स्वास्तिक, शुभ-लाभ एवं गोबर के कंडों का निर्माण कर उनके विक्रय से अच्छी आय अर्जित कर रही हैं।
सरस्वती आजीविका समूह की महिलाओं द्वारा जयश्री गुरूदेव तपश्री गौशाला के नाम से गौशाला का संचालन शुरू किया। शुरू में गौशाला में कम गौवंश होने के कारण महिलाओं को कोई विशेष आय नहीं हो पाती थी, किन्तु धीरे-धीरे गौशाला में गायों एवं उनके बछड़े आने शुरू हो गये। वर्तमान में गौशाला में 85 गाय व उनके बछड़े हैं। जैसे ही गौशाला में गाय एवं बछड़ों की संख्या में बढ़ोत्तरी होनी शुरू हुई, वैसे ही समूह ने आय अर्जन की दिशा में सोचना शुरू कर दिया। इस संबंध में आजीविका मिशन द्वारा समूह की सदस्यों को तकनीकी ज्ञान एवं आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराकर उन्हें गोबर से गौकाष्ट (गोबर की लकड़ी) एवं गाय के मूत्र से गोनाइल बनाने का प्रशिक्षण प्रदाय कराया गया। समूह के सदस्यों के द्वारा गौशाला में इकट्ठे होने वाले गोबर से गौकाष्ठ, गोनाइल, धूपबत्ती, गोबर के दीये, स्वास्तिक, शुभ-लाभ एवं गोबर के कंडों का निर्माण शुरू कर दिया।
सरस्वती आजीविका स्वयं सहायता समूह के सदस्यों द्वारा से गौ काष्ठ की ईकाई स्थापित करने एवं अन्य सामग्री क्रय करने हेतु ग्राम स्तरीय संगठन से कुल 80 हजार रूपये ऋण के रूप में लिए गये। उक्त राशि से गौकाष्ठ बनाने की मशीन जो कि लगभग 65 हजार रूपये में आई एवं अन्य सामग्री का क्रय किया गया। कोरोना काल में मोक्षधामों में लकड़ी की कमी को देखते हुए गौशाला में तैयार की जा रही गौकाष्ठ (गोबर की लकड़ी) को त्रिवेणी गौशाला एवं गंज मोक्षधाम बैतूल को विक्रय किया जा रहा है।
अभी तक कुल 125 क्विंटल गौकाष्ठ को समूह द्वारा निर्मित कर विक्रय किया गया है, जिससे समूह को 87500 रूपए का मुनाफा हुआ। साथ ही गौमूत्र के अर्क से तैयार गोनाइल (फिनाइल) कुल 500 लीटर बनाकर तैयार की गई। जिसकी एक लीटर की कीमत 50 रूपए प्रति बॉटल रखी गई है। अभी तक समूह द्वारा कुल 500 लीटर गोनाइल की बिक्री से लागत निकालकर लगभग 15000 रूपए का मुनाफा हुआ।
सरस्वती आजीविका स्वयं सहायता समूह के सदस्यों द्वारा प्रारंभ में मजदूरी का कार्य किया गया जा रहा था। मप्र-डे राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन में सरस्वती समूह में जुडऩे के बाद समूह को गौशाला संचालित करने का कार्य मिला, जिससे गायों के गोबर व गौमूत्र से भिन्न-भिन्न प्रकार के उत्पाद तैयार किये जा रहे हैं। समूह के सदस्य बताते हैं कि कोरोना काल में जनता कफ्र्यू में अब उन्हें मजदूरी करने के लिये बाहर नहीं जाना पड़ता है। वे सभी अपने ही ग्राम में रहकर गौशाला में गायों की सेवा करती हैं और गोबर व गौमूत्र से बनी सामग्री को विक्रय करके अच्छा खासा मुनाफा कमाती है।
सरस्वती आजीविका समूह की अध्यक्ष रति कुमरे द्वारा बताया गया कि प्रारंभ में गौशाला में किसी भी प्रकार का कोई भी फायदा नहीं हुआ, किन्तु धीरे-धीरे गौशाला में गायों की वृद्धि होती गई और हमारे समूह को सामग्री निर्माण करने के लिये पर्याप्त गोबर और गौमूत्र मिल रहा है जिससे सभी उत्पाद बनाने में आसानी जाती है और हम सभी ये कार्य में रूचि ले रहे हैं और अब हम इस कार्य से बहुत खुश हैं।
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