कोरोना से जंग के लिए बैतूल में बनाया पीपीई सुरक्षा कवच
डॉक्टर सहित पैरामेडिकल स्टाफ को कोरोना मरीज का उपचार करने मिलेगी सुरक्षा
नामी कंपनियों द्वारा बनाया जाने वाला 1200 से 1500 रुपए का किट 150 रुपए में बंदियों ने बनाया
बैतूल। वर्तमान समय में देश और दुनिया कोरोना वायरस कोविड 19 से बुरी तरह से जूझ रही हैं। देश और प्रदेश में हालत यह हो गई है कि डॉक्टरों सहित पैरामेडिकल स्टाफ के पास कोरोना संक्रमित मरीजों का उपचार करने के लिए पीपीई किट तक उपलब्ध नहीं हो पा रही है। ऐसी विषम परिस्थितियों में आमला विधायक डॉ. योगेश पंडाग्रे, जिला रक्तकोष अधिकारी डॉ. अंकिता सीते और घोड़ाडोंगरी बीएमओ संजीव शर्मा ने आपसी समन्वय से ऐसा होम मेड पीपीई किट तैयार कर लिया है जो कि देश और दुनिया की नामी कंपनियाँ 1200 रुपए से 1500 रुपए में बनाती है। बैतूल में बनाए गए इस किट की खासियत यह है कि इसे पहनने के बाद डॉक्टर सहित पैरामेडिकल स्टाफ 100 फीसद कोराना वायरस के संक्रमण से सुरक्षित रहेगा। कोरोना के खिलाफ बैतूल में बनाया गया पीपीई के रूप में सुरक्षा कवच कारगर साबित हो रहा है। शनिवार को बकायदा इस पीपीई किट का डेमोस्ट्रेशन किया गया जिसमें सांसद डीडी उईके, विधायक डॉ. योगेश पंडागे्र, सीएमएचओ डॉ. जीसी चौरसिया, सिविल सर्जन डॉ. एके बारंगा, आरएमओ डॉ. एके पांडे, डॉ अरुण जयसिंहपूरे, फारेस्ट एसडीओ शाहपुर एनके शर्मा सहित स्टाफ के मौजूद था। उल्लेखनीय है कि यह किट बैतूल जिला जेल के बंदियों द्वारा डॉक्टरों के मार्गदर्शन में तैयार की जा रही है।
ऐसे आया था विचार
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के चलते आए दिन जिला अस्पताल में आ रहे संदिग्ध मरीजों से जिला अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर सहित पैरामेडिकल स्टाफ में कहीं ना कहीं एक भय का वातावरण निर्मित हो रहा था। यह इसलिए क्योंकि अस्पताल में पीपीई किट (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट) बेहद कम उपलब्ध थे। यही वजह है कि जिले में ही पीपीई किट बनाने का विचार सबसे पहले जिला ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. अंकित सीते के मन में आया। उन्होंने इस विचार को जब आमला विधायक डॉ. योगेश पंडाग्रे को बताया तो उन्होंने डिजाईन में काफी बदलाव किये। इतना ही नहीं इस किट को बनाने में घोड़ाडोंगरी बीएमओ डॉ. संजीव शर्मा ने कैप कैसा होना चाहिए यह बताया। तीनों डॉक्टरों डॉ. पंडाग्रे, डॉ. सीते और डॉ. शर्मा ने संयुक्त विचार-विमर्श कर डिजाईन तैयार किया।
मात्र 150 रुपए में तैयार हो गया किट
देश और दुनिया की नामी कंपनियों द्वारा जिस पीपीई किट को 1200 रुपए से लेकर 1500 रुपए में बनाकर बेचा जाता है। ठीक उसी तरह के किट का निर्माण जिला मुख्यालय पर डॉक्टरों की सलाह पर जिला जेल के बंदियों राहुल, बस्तीराम, नितेश, हेमंत एवं गौना के द्वारा तैयार की गई। किट की पैकिंग में रमेश जैन, विजया पोटफोड़े, अलका गलफट, राजेश बोरकड़े ने सहयोग दिया। इन सभी की मेहनत से महज 150 रुपए में किट तैयार कर लिया गया है। पीपीई किट बनाने को लेकर सीएमएचओ द्वारा जहां छिंदवाड़ा से (टारपोलिन) रॉ मटेरियल उपलब्ध कराया गया वहीं बंदियों ने इस किट की सिलाई की। डॉ. योगेश पंडाग्रे ने बताया कि पीपीई किट फेस मास्क के साथ पूरी तरह से तैयार है। इस किट को पहनने के बाद में डॉक्टर सहित पैरामेडिकल स्टाफ स्वयं को सुरक्षित महसूस करेगा। इस किट को बनाने के लिए सांसद दुर्गादास उइके ने अपनी निधि से 3 लाख रुपए दिए हैं।
100 फीसद सुरक्षित है पीपीई किट
आमला विधायक और पेशे से डॉक्टर योगेश पंडाग्रे ने बताया कि किट की समस्या के चलते कहीं ना कहीं डॉक्टर सहित पैरामेडिकल स्टाफ का मनोबल बनाए रखना इस समय सबसे बड़ी जिम्मेदारी थी। पीपीई किट के बन जाने के बाद अब डॉक्टर सहित पैरामेडिकल स्टाफ को यह अच्छी तरह से भान हो गया है कि इसे पहनने के बाद वह 100 फीसद सुरक्षित रहेंगे। एक तरह से यह भी कहा जा सकता है कि कोरोना संक्रमित के सामने जाने पर पीपीई के रूप में एक सुरक्षा कवच उनकी रक्षा करेगा। डॉ. पंडाग्रे ने कहा कि नामी कंपनियों द्वारा बनाए जाने वाले किट से बैतूल में बनाया किट किसी भी कीमत पर कम नहीं है। इस किट को पहनकर 100 फीसदी सुरक्षित रहा जा सकता है। इतना ही नहीं इससे सैनेटाईज कर बार-बार उपयोग भी किया जा सकता है।
बैतूल के प्रयोग से कई जिले होंगे लाभान्वित
आदिवासी बाहुल्य बैतूल जिले में किए गए इस अनोखे प्रयोग से आसपास के कई जिलों के डॉक्टर सहित पैरामेडिकल स्टाफ लाभान्वित होगा। वर्तमान में सभी जिले पीपीई किट की कमी से बुरी तरह से जूझ रहे हैं। बैतूल में प्रतिदिन 30 से 35 किट बनाए जा रहे हैं। जबकि इन्हें और अधिक संख्या में बनाने के लिए वन विभाग के स्व सहायता समूह की मदद लिए जाने पर विचार किया जा रहा है। डॉ. योगेश पंडाग्रे ने बताया कि वन विभाग के एसडीओ से उनकी चर्चा हो चुकी है। आने वाले दिनों में प्रतिदिन 200 से 300 पीपीई किट स्वसहायता समूह बनाकर उन्हें दे देंगे। इससे जहां जिले में किट की पूर्ति हो जाएगी वहीं अन्य जिलों में भी इसकी सप्लाई की जा सकेगी। डॉ. पंडाग्रे सहित उनके साथियों की इस सोच ने सूबे में कमाल कर दिया है।
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