अमृत सरोवर मे हो रहा गोलमाल

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  • चिचोली अमृत सरोवर में बेधड़क चल रही है कि मशीनें

चिचोली। मनरेगा के तहत पंचायतों में अमृत सरोवर खोदे जा रहे हैं। पंचायत का पूरा सिस्टम इसी बात पर फोकस कर रहा है कि बारिश के पहले यह काम हो जाए। इस काम के लिए जिला पंचायत सीईओ बैठक पर बैठक ले रहे हैं और बैठक में इंजीनियर से लेकर मैदानी अमले तक को हड़का रहे हैं। ऐसी स्थिति में मैदानी अमला भी आनन फानन में तालाब खोदने पर आमदा नजर आ रहा है। उनका प्रयास है कि जैसे तैसे काम पूरा हो जाए। भले ही मनरेगा की मूल भावना की धज्जियां उड़ जाए। जिले की पंचायतों में जहां जहां अमृत सरोवर बनाए जा रहे हैं। वहां-वहां मशीनें धड़ल्ले से चल रही है। चूंकि अभी तालाबों में पानी नहीं आया है। अभी तत्काल जांच करा ली जाए तो पोकलेन और जेसीबी के पंजों के निशान इस बात की खुली गवाही देंगे कि पूरा काम मशीन से हुआ है। मशीनें चल रही है। इसको जायज ठहराने के लिए थोड़ा सा पैसा 15 वें वित्त का भी लगाया जा रहा है जिससे की आरोप प्रत्यारोप से बचा सके लेकिन सच्चाई यह है कि तालाब पूरी तरह से मशीनों से ही बन रहे हैं।
जिले में बन रहे हैं 107 अमृत सरोवर
जिले की दसों की जनपद में कुल मिलाकर 107 अमृत सरोवर बनाए जा रहे हैं। अधिकांश जनपदों में दस या दस से अधिक अमृत सरोवर स्वीकृत किए गए हैं। केवल पट्टन ब्लाक में ही सात अमृत सरोवर बनाए जा रहे हैं। इन्हेंं हर हाल में तीन जून तक पूरा करने के सख्त आदेश है।
करीब तीस करोड़ का है इसका बजट
जिले में जो अमृत सरोवर बन रहे हैं उनकी लागत करीब तीस करोड़ बताई जा रही है जिसमें बड़ी हिस्सा मनरेगा का कहना है। केवल थोड़ा सा हिस्सा 15 वें वत्ति से जोड़ गया है। यह भी कहा जा रहा है कि जनसहयोग भी लिया जा रहा है। जो जनसहयोग और 15 वें वित्त का सहारा लिया जा रहा है वह केवल मशीनों को चलाने के लिए है।

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