- वर्षो से ग्रामो के बीच मार्गो के निर्माण की हो रही मांग

आमला। नगर के आसपास के अनेको ग्राम ऐसे है जिनका बारिश में एक दूसरे से संपर्क टूट जाता है और लंबी दूरी तय करना पड़ता है ।जिससे किसानों सहित राहगीरों का समय बर्बाद होता है।पिछले 20 वर्षों से ग्रामो के बीच 2 से 3 की मी के कच्चे मार्गो को पक्के मार्ग निर्माण की मांग की जा रही है लेकिन अब तक इस ओर कोई हल नही निकल पाया है चुनाव के समय जनप्रतिनिधियों द्वारा पक्की सड़क बनाने के दावे किए जाते है लेकिन 5 साल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद किसान व आमजन अपने आपको ठगा महसूस करते है।
यह दर्जनों ग्रामो के मार्ग वर्षो से है कच्चे
गौरतलब होगा की ब्लाक के बड़े बड़े ग्राम व पंचायतों के राजस्व रिकार्ड में दर्ज मार्ग वर्षो से खस्ताहाल व कच्चे है जैसे रमली से कमली, नांदपुर से ससाबड, अंधारिया, अंधारिया से नांदपुर देवठान, जामठी, ससुन्द्रा से बेल मंडई, छावल से देवगांव कुटखेड़ी से डोडावाणी महोली, जम्बाड़ा से रानीडोंगरी, अंधारिया से नाहिया देय्यत बाबा ,परसोड़ा से पोहि ,लालावाड़ी से राजोला ,कुंड़ारा से बारंगबाडी, पस्तलई से मालेगाव नरेरा से दियामहु सहित अनेको ग्राम पंचायतों के ढांने ग्रामो के मार्ग आज भी कच्चे है जो बारिश में मार्ग में कीचड़ दलदल होने से एक दूसरे से संपर्क तोड़ देते है। फिर किसानों को लंबी दूरी तय कर अपने खेतों व ग्रामो में आवाजाही करनी पड़ती है।
ससाबड़ से नांदपुर वल्लाचाल मार्ग के निर्माण की मांग
नगर से सटी ग्राम पंचायत नांदपुर और ससाबड़ वल्लाचाल तक वर्षो में पक्की सड़क निर्माण नही हो पाई जबकि यह तीनो ग्राम आसपास लगे हुए है लेकिन इनके बीच आज तक पक्की एप्रोच सड़क नही पाई जबकि पिछले 30 वर्षों से अधिक समय से किसान मांग करते आ रहे है। ससाबड़ से वल्लाचाल नांदपुर के बीच हजारों हेक्टेयर में किसान खेती करते है बारिश में मार्ग बंद होने पर उन्हें अपने खेतों में खाद बीज अन्य सामग्रियो को लाने ले जाने में काफी परेशानी उठानी पड़ती है। नांदपुर के युवराज साहू अनिल पुंडे ने बताया बारिश में नांदपुर ससाबड़ के बीच ढाई की मी रास्ता बंद होने पर 8 की मी की दूरी तय कर सोसायटी जाना पड़ता है जिससे किसानों को परिवहन का खर्चा उठाना पड़ता है।
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