नीमपानी ढाबा सहित दर्जनों मकानों पर चला प्रशासन का बुल्डोजर

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पाढर। बैतूल से भोपाल तक बन रही फोरलेन सड़क निमा्रण के लिए प्रशासन द्वारा अधिग्रहित की गई भूमि खाली करवाने प्रशासन की टीम सोमवार को भारी पुलिस बल के साथ नीमपानी पहुंची। प्रशासन द्वारा पूर्व में दिए गए मौको के बाद भी जमीन खाली नहीं करने वाले लोगों का अतिक्रमण जेसीबी और पोकलेन मशीन से हटाया। इस दौरान टीम ने नीमपानी ढाबा को पूरी तरह जमीदोंज कर दिया वहीं नीमपानी के स्वास्थ्य केन्द्र, ग्राम पंचायत भवन, चौपाल के साथ ही लगभग दर्जनभर मकान भी तोड़ दिए। अतिक्रमण हटाए जाने ग्रामीणों ने एक दिन की मोहलत मांगी लेकिन इसे अनसुना करते हुए टीम ने सड़क निर्माण के लिए आवश्यक पूरा अतिक्रमण हटा दिया। बैतूल से भोपाल तक बन रही फोरलेन सड़क निर्माण के लिए प्रशासन ने लगभग आठ साल पहले जमीन अधिग्रहित की थी। सड़क निर्माण करने वाली कंपनी की लेटलतीफी के कारण अभी तक सड़क नहीं बन पाई थी। जिससे सड़क किनारे अधिग्रहित की गई जमीन खाली नहीं हुई थी। सड़क के लिए भूमि खाली करवाने शाहपुर एसडीएम अनिल सोनी, तहसीलदार वैद्यनाथ वासनिक, घोड़ाडोंगरी तहसीलदार मोनिका विश्वकर्मा, शाहपुर थाना प्रभारी सहित बड़ी संख्या में पुलिस बल, आरआई पटवारी की टीम नीमपानी पहुंची। इस दौरान टीम ने नीमपानी ढाबा से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की। नीमपानी ढाबा के संचालक अरूण सिंह, नंदन सिंह ने अधिकारियों से कहा कि वर्तमान में सड़क निर्माण के लिए जितनी जमीन आवश्यक है उतनी वे खाली कर चुके है। शेष जमीन भी वे एक दिन में खाली कर देंगे। लेकिन अधिकारियों ने उनकी एक नहीं सुनी। बड़ी संख्या में पुलिस बल लेकर पहुंची टीम ने चालू ढाबा में जेसीबी चलाना शुरू कर दी। कुछ ही देर में पूरा ढाबा जमीदोंज कर दिया। इस दौरान टीम ने सामान हटाने का भी मौका नहीं दिया जिससे ढाबा में लगभग 3 से 4 लाख रूपए का सामान भी बर्बाद हो गया। टीम ने ढाबा में चल रहा तंदूर भी पानी डालकर बुझाया और उसे जेसीबी से तोड़ दिया। प्रशासन की इस कार्रवाई से ग्रामीणों में आक्रोश था। दर्जनभर मकान भी तोड़े नीमपानी ढाबा को पूरी तरह जमीदोंज करवाने के बाद टीम ग्राम नीमपानी पहुंची। यहां भी पूर्व में चिन्हित की गई जमीन में आने वाले मकान भी तोड़ दिए। इस दौरान गांव में अफरा-तफरी मच गई। लोग मकानों से सामान समेटने लगे लेकिन टीम ने उन्हें इसका भी मौका नहीं दिया और पोकलेन मशीन और जेसीबी की मदद से मकान तोड़ दिए। इस दौरान टीम ने सामान हटाने का भी मौका नहीं दिया। शासकीय भवन भी तोड़े इस दौरान प्रशासन की टीम ने ग्राम पंचायत भवन का एक हिस्सा, स्वास्थ्य केन्द्र भवन और चौपाल भी तोड़ दिया। स्वास्थ कर्मियों ने भी टीम से कहा कि यहां प्रसव नहीं हो पाएगा। जब सड़क निर्माण कार्य शुरू होगा तब भवन तोड़ देंगे लेकिन टीम ने किसी की कोई बात नहीं सुनी और सड़क निर्माण के लिए आवश्यक जमीन खाली करवा ली।

जिम्मेदार बोले
ग्रामीणो को पूर्व में ही मुआवजा दे दिया गया। 15 दिन पहले ग्राम सभा में भी सभी को जमीन खाली करने के निर्देश दिए थे। चार दिन पूर्व एक बार फिर सभी को अंतिम मौका देते हुए दो दिन में जमीन खाली करे नहीं तो प्रशासन द्वारा हटवाने की बात बता दी थी। इसके बावजूद जमीन खाली नहीं की गई तो मजबूरी में प्रशासन को जमीन खाली करवानी पड़ी।
मोनिका विश्वकर्मा, तहसीलदार, घोड़ाडोंगरी

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