ढाई साल से लापता बेटे को देख भर आई माँ की आखें

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चार बहनों का इकलौता भाई के जिंदा होने की खबर से बहनों में छाई खुशियाँ
थोड़ा मंदबुद्धि होने से ढ़ाई साल पहले झारखंड के गुड्डा जिले से हुआ था लापता
बैतूल।
पूरे ढ़ाई साल से अधिक समय से लापता हो चुके अपने इकलौते बेटे और चार बहनों के इकलौते भाई के कहीं पर भी नहीं मिलने पर उम्मीद का दामन भी छूट रहा था और धीरे-धीरे वक्त भी इस याद को धुंधला करते जा रहा था। लेकिन माँ तो माँ होती है उसकी ममता यह मानने को कहां तैयार होती है कि उसका बेटा अभी कभी नहीं आएगा? माँ की ममता कहें या फिर ईश्वर का न्याय की आखिरकार ढाई साल बाद 1300 किमी. दूर बिछड़े बेटे से व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से जब माँ-बेटे और बहनों से मिलन हुआ तो सभी की आंखें भर आई। माँ और बहनों ने तो यहां तक कह दिया था कि उनकी उम्मीद भी डोर भी कमजोर पड़ते जा रही थी लेकिन ईश्वर ने उनकी सुन ली और उनके बेटे और भाई को मिला दिया। अगर यह संभव हो सका है तो बैतूल बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष प्रशांत मांडवीकर और सक्रिय सदस्यों संजय शुक्ला, इरशाद हिन्दुस्तानी, हेमलता कुंभारे, रश्मि साहू सहित विशेष पुलिस किशोर इकाई सदस्य विनोद शुक्ला की वजह से जिन्होंने इस बालक के माता-पिता को तलाशने जमीन-आसमान एक कर दिया। लॉक डाऊन खत्म होने और ट्रेन के प्रारंभ होने के बाद इस बालक को उसके परिजनों के पास पहुंचाया जाएगा।
एक नजर में पूरा घटनाक्रम
आमला रेलवे स्टेशन के पास एक 16 वर्षीय विपिन माडिया 27 फरवरी 2020 को घूमता हुआ दिखाई दिया। पुलिस ने उसे बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया जहां से एबनेजर बाल गृह भेज दिया गया। बाल गृह का निरीक्षण करने के उपरांत बच्चे की लगातार काउंसलिंग की गई। जिसमें बालक ने अपना नाम विपिन माडिया पिता पूरन माडिया बताया था। चूंकि विपिन थोड़ा मंदबुद्धि था इसलिए वह बार-बार बहक जाता है इसलिए पूरी जानकारी नहीं मिल पा रही थी।
सीडब्ल्यूसी ने ऐसी की पड़ताल
चूंकि बालक विपिन की भाषा कभी बिहारी, तो कभी यूपी तो कभी उड़ीसा की लग रही थी इसलिए बाल कल्याण समिति अध्यक्ष और सदस्य ने पहले बिहार, उत्तर प्रदेश और उड़ीसा संपर्क किया लेकिन सफलता नहीं मिली। उसके बाद अध्यक्ष प्रशांत मांडवीकर ने बिहार निवासी धनजी शर्मा को विपिन का बनाया वीडियो दिखाया। श्री शर्मा ने यह वीडियो अपने दोस्त जो कि झारखंड के पास का है उसे वीडियो देखकर और विपिन द्वारा गुड्डा जिले का नाम और गांव का नाम लिए जाने की भाषा को पहचान लिया।
समिति ने ढूंढ निकाला जिला और गांव
विपिन द्वारा बार-बार गुड्डा और बरमसिया का उल्लेख करता था। इन नामों को जब गुगल पर सर्च किया तो गुड्डा झारखंड का जिला निकला और उसका ब्लाक पत्थरगमा का गांव बरमसिया निकला जहां का विपिन रहने वाला है। इसके बाद गुड्डा की चाइल्डलाइन के नरेंद्र झा और प्रकाश शुक्ला से संपर्क किया और चाईल्ड मेम्बर ग्राम बरमसिया पहुंचे और विपिन का फोटो दिखाया तो उसकी माँ ललिताबाई और बहन सुनीता ने उसे पहचान लिया। इसके बाद दोनों मां-बेटी की बात व्हाट्सएप काल से शाहपुर बाल गृह एबेनेजर में रह रहे विपिन से कराई तो सभी की आंखें भर आई।
देखने लायक था मां-बेटे का मिलन
बात भले ही माँ-बेटे और बहन की व्हाट्सएप काल पर हो रही थी लेकिन यह मिलन देखने लायक था। ढाई साल से जिस माँ का बेटा और बहन का भाई लापता हो। उस माँ और बहनों पर क्या बीत रही होगी इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। लेकिन इनके मिलन पर कितनी खुशी हो रही थी इसको शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। यदि आज विपिन माडिया का मिलन उसकी माँ और बहनों से हो सकता है तो इसके लिए बैतूल की बाल कल्याण समिति, एसजीपीयू और स्टाफ की जितनी भी प्रशंसा की जाए वह कम ही होगा।

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