सावित्री बाई फूले की 190 वीं जयंती मनाई

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सारनी। त्रिरत्न बौद्ध विहार समिति सारनी एवं संघमित्रा महिला मंडल सारनी के संयुक्त तत्वावधान में सावित्री बाई फूले की 190 वीं जयंती त्रिरत्न बौद्ध विहार सारनी मे मनाई गई सर्व प्रथम तथागत भगवान बुद्ध एवं डां बाबा साहब अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किये गये एवं सावित्री बाई फूले के छाया चित्र पर माल्यार्पण कर सभी उपासक उपासिकाओं ने सावित्री बाई फूले के छाया चित्र पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रध्दांजलि दी समिति के अध्यक्ष नारायण चौकीकर ने बताया की सावित्री बाई फूले को देश की प्रथम महिला शिक्षिका होने का गौरव प्राप्त है सावित्री बाई फूले का विवाह 9 वर्ष की आयु में 13 वर्षिय ज्योतिबा फूले से हुआ था वे अशिक्षित थी उन्हें पति ज्योतिबा फूले ने घर पर ही शिक्षित किया। उस समय महिलाओं को शिक्षा का अधिकार नहीं था किसी भी समाज की महिलाओं को पढने का अधिकार नहीं था उन्होंने 1 जनवरी 1848 में प्रथम बालिका स्कूल खोला।उच्च वर्णिय लोगों ने उनका बहुत विरोध किया उन्होंने छुआछूत मिटाने, बाल विवाह रोकने एवं विधवा पुनर्विवाह के लिए सराहनीय कार्य किए बहुत कम समय में उन्होंने 18 स्कूल खोले।पति ज्योतिबा फूले के साथ बाल प्रतिप्रदा गृह का निर्माण किया जिसमें विधवाओं के रहने की व्यवस्था की गई। 1897 में प्लेग की बीमारी से ग्रस्त लोगों की सेवा करते हुए उनका निधन हो गया। सभी उपासक उपासिकाओं ने उनकी जीवनी पर प्रकाश डाला। विचार व्यक्त करने वालों में ललिता पाटील, नंदा थमके, ललिता खातरकर, सीता नागले, चंद्रकला गजभिये, ममता चौकीकर, मनोरमा हुमने, पिंकी वाहने, निर्मला वामनकर, इंदु गोलाईत, सविता सिरसाठ, कांता बाई मुझमुले, सत्यकला मेश्राम, कुसुम खातरकर, देवकी झरबडे, उपासकों में मुन्ना लाल कापसे, किरण तायडे, रामचंद्र हुमने ने अपने विचार रखे। विठ्ठल ढोके, कंचना ढोके,रिया चौकीकर, आदर्श चौकीकर, उकण्ड राव खातरकर, अशोक गजभिये, अर्जुन नागले आदि उपस्थित रहे। मंच संचालन निलिमा मुझमुले ने किया। आभार व्यक्त समिति के अध्यक्ष  नारायण चौकीकर ने किया।

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