शहर में रोजगार बढ़ाने को लेकर जनप्रतिनिधियों ने दिखाई एकजुटता,छह घंटे चली बैठक

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  • अंतर विभागीय कार्यशाला में 24 उधमी आए आगे
  • उद्योग स्थापित करने जमीन आवंटन और सरकार से मिलने वाले अनुदान की दी विस्तृत जानकारी

सारनी। पाथाखेड़ा के ऑफीसर्स क्लब में उद्योग विभाग द्वारा क्षेत्रीय विधायक के नेतृत्व में अंतर विभागीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें सांसद डीडी उइके, पूर्व सांसद हेमंत खंडेलवाल, विधायक योगेश पंडाग्रे, कलेक्टर राकेश सिंह,नगर पालिका अध्यक्ष आशा भारती, एसडीएम अनिल सोनी के अलावा मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी, वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड, जल संसाधन विभाग, विद्युत वितरण कंपनी, नगरपालिका, मत्स्य विभाग,जिला पंचायत,फारेस्ट विभाग समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में प्रमुख 20 बिंदुओं पर विस्तार पूर्वक चर्चा कर समस्याओं के निराकरण को लेकर विभागों को निर्देश दिए। सुबह 11:30 बजे प्रारंभ हुई बैठक में करीब 2 घंटे तक शहर के विकास को लेकर और औधोगिक क्षेत्र विकसित करने पर आला अफसरों ने सुझाव व समस्याओं के निराकरण के निर्देश दिए। इस मौके पर उद्योग विभाग द्वारा जानकारी दी गई कि सूखा ढाना में औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने 18 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध है। इसमें से 7 हेक्टेयर जमीन आरक्षित है। वहीं 11 हेक्टेयर जमीन आविकसित है। इस जमीन को औद्योगिक क्षेत्र के लिए उद्यमियों को स्थानीय कीमत से महज 5 से 15% राशि में उपलब्ध कराई जाएगी। इस जमीन पर उद्योग स्थापित करने पर शासन द्वारा अधिकतम 80% तक अनुदान की व्यवस्था की गई है। इसके लिए उद्योग विभाग के पास आधार, निवास, पीपीआर जैसे जरूरी दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता है। साथ ही उधमी अपना प्रोजेक्ट उद्योग विभाग को उपलब्ध करा सकते हैं। उद्योग विभाग द्वारा जानकारी दी गई कि किसी भी उधमी को उद्योग स्थापित करने अधिकतम 20 से 25% पूंजी की आवश्यकता होती है। इसी बीच वरिष्ठ उद्यमी आशीष पांडे द्वारा कहा गया कि शासन पहले पूरे प्रोजेक्ट की जांच करती है। उसके बाद 4 साल में मध्यप्रदेश शासन और 1 साल में केंद्र सरकार अनुदान उपलब्ध कराती है। इसलिए नए उद्यमियों को यह जानना बहुत जरूरी है कि प्रारंभ में उद्योग स्थापित करने पूरी राशि उद्यमियों को ही लगानी पड़ती है। बैठक में विधायक ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि औद्योगिक क्षेत्र स्थापित करने जो भूमि उद्यमियों को आवंटित की जा रही है। उस पर सिर्फ उद्योग ही स्थापित होगा ना कि उस भूमि को उसमें पहले खरीदे और बाद में विक्रय कर दे। युवा उद्यमी विजय मालवीय ने सुझाव दिया कि मेरे द्वारा राख की उपयोगिता बढ़ाने रिसर्च सेंटर खोलने की प्रक्रिया चल रही है। विधायक द्वारा इस तरह की बैठक आयोजित कर नए उद्यमियों को मौका दिया है पर भारत सरकार के नोटिफिकेशन का पूर्ण पालन इस क्षेत्र में नहीं हो रहा। उन्होंने कहा पावर जनरेटिंग कंपनी से बहुत बड़ी मात्रा में राख निकलती है। सारनी क्षेत्र में राख का अथाह भंडारण है जो इस क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी समस्या भी है। इस राख से रेत और ब्रिक्स बनाई जा सकती है। जिसका उपयोग 300 किलोमीटर के दायरे में सभी निर्माण कार्यों में किया जा सकता है। लेकिन सरकार के नोटिफिकेशन का पालन नहीं होने से प्रोडक्ट की डिमांड नहीं है जो उद्यमियों की सबसे बड़ी समस्या है। पर्यावरण प्रदूषण पर भी इसका विपरीत असर पड़ रहा है। विशाल बत्रा ने कहा यह बहुत अच्छा प्रयास है। क्षेत्र के विकास के लिए टर्निंग प्वाइंट भी साबित हो सकता है। डब्ल्यूसीएल और एमपीपीजीसीएल को जिन भी सामानों की आवश्यकता पड़ती है। उसकी सूची क्षेत्रीय उद्यमियों को उपलब्ध कराएं। जिला उद्योग केंद्र को उपलब्ध कराएं। ताकि जरूरत की सामग्री का निर्माण इसी क्षेत्र में करके रोजगार के नए साधन उपलब्ध कराए जा सकते हैं। पूर्व सांसद हेमंत खंडेलवाल ने कहा इस क्षेत्र में कोल्ड स्टोरेज, रिसर्च सेंटर, डेयरी, ब्रिक्स प्लांट जैसे जरूरत के उद्योग स्थापित करना आसान होगा। सांसद दुर्गादास उइके ने कहा सारणी, पाथाखेड़ा क्षेत्र को पहले मिनी इंडिया कहा जाता था। मैं 20 वर्षों तक यहां रहा हूं। तीन बार मेरा स्थानांतरण हुआ। मैंने यहां इसी क्षेत्र में रहने के लिए स्टे तक लाया। जीवन के 20 साल मैंने यहां दिए हैं इस क्षेत्र का विकास बहुत जरूरी है। कलेक्टर राकेश सिंह ने कहा सारणी के विकास को गति देने यह बैठक बुलाई गई है। आने वाले समय में भी इस तरह की बैठक आयोजित की जाएगी। उन्होंने कहा कहां यहां स्वास्थ्य, शिक्षा में सुधार के अलावा रोजगार के साधन बढ़ाने की जरूरत है। बैठक में मध्य प्रदेश पावर जेनरेटिंग कंपनी के अधिकारियों ने सारणी में प्रस्तावित 660 मेगावाट की यूनिट प्रस्तावित होने की जानकारी दी। लेकिन यह भी कहा कि यूनिट स्थापित करने के  की मंजूरी का इंतजार है। वहीं डब्ल्यूसीएल के अधिकारियों ने नई खदान खोलने की जानकारी दी। बैठक में सतपुड़ा जलाशय में फैली खरपतवार नष्ट करने। सतपुड़ा ताप ग्रह के चोरी हुए सैकड़ों आवास,  मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम द्वारा निर्माण किए गए बैतूल डेस्टिनेशन पार्क, सारणी को तहसील बनाने जैसे अन्य बिंदुओं पर भी विस्तार पूर्वक चर्चा हुई। सतपुड़ा जलाते में फैली खरपतवार को लेकर सांसद ने अधिकारियों को जमकर फटकार भी लगाई। डब्ल्यूसीएल के जीएम पीके चौधरी ने प्रस्तावित खदान, सीएसआर फंड से किए जा रहे विकास कार्य और क्षेत्र की जानकारी दी। कोयला खदान खोलने को लेकर जमीन आवंटन की प्रक्रिया को लेकर सांसद डीएफओ से बोले विकास कार्य में कोई अंतर्द्वंद्व नहीं रहे। 100 प्रतिशत सकारात्मक कार्य करे। राज्य और केंद्र में हमारी सरकार है। डब्ल्यूसीएल जीएम ने बैठक में जमीन आवंटन को लेकर रखी समस्याऐं। जीएम पीके चौधरी ने कहा सीएसआर फंड के अलावा डीएमएफ में 2016-17 से अब तक 76 करोड़ रुपए पाथाखेड़ा क्षेत्र ने दिए गए हैं। जबकि पाथाखेड़ा क्षेत्र 300 करोड़ के सालाना नुकसान वाला क्षेत्र है। इस बात से भी अवगत कराया। बैठक में रंजीत सिंह, कमलेश सिंह, नागेन्द्र निगम,विशाल बत्रा, सुधा चंद्रा, किशोर बरदे, दशरथ सिंह जाट,  संजय अग्रवाल, मोहन मोरे, रामकिशोर देशमुख, विनय मालवीय, बंटी अग्रवाल, राजेन्द्र मानकर, जीआर कापसे, राजेन्द्र चौरे, मोहम्मद ताज, प्रकाश शिवहरे, रमेश हरोडे,राजू बतरा,राजकुमार नागले,संतोष देशमुख,रेवाशंकर मगरदे,प्रकाश ड़ेहरिया,योगेश बर्डे,जीपा सिह,शिबू सिह,प्रविण सोनी,राहूल कापसे समेत अन्य उपस्थित रहे।

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