- वैक्सीन ट्रायल के लिए वॉलंटियर बने दीपक की मौत पर उठ रहे सवाल पर CM का जवाब
- दिग्विजय सिंह भी ट्रायल के तरीकों को लेकर चिकित्सा शिक्षा मंत्री को घेर चुके हैं
भोपाल। पीपुल्स अस्पताल भोपाल में वैक्सीन ट्रायल के लिए वॉलंटियर बने दीपक की मौत मामले में अब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सफाई दी है। पत्रकारवार्ता के दौरान उन्होंने वैक्सीन के ट्रायल को लेकर कहा कि स्वास्थ्य मंत्री ने इस संबंध में बात रखी है। विसरा जांच के लिए भेज दिया है। जांच रिपोर्ट आ जाएगी। उसमें स्थिति साफ हो जाएगी, लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि किसी भी वैक्सीन का दुष्प्रभाव होता है, तो अधिकतम तीन में दिखने लगा है। इतने दिन बाद नहीं होता है। इसलिए मैं निवेदन करना चाहता हूं कि वैक्सीन के मामले को गंभीरता से ले। ऐसी कोई धारणा न बने, जिससे वैक्सीनेशन को लेकर गलत धारणा बना। वैक्सीन की तैयारी भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुसार चल रही है। प्रधानमंत्री से चर्चा और वैक्सीन मुद्दा होगा। फ्रंट लाइन वर्कर्स के लिए पहले चरण में वैक्सीन लगेगा। कितने डोज आएंगे, अभी इसकी डिटेल आएगी। सभी कुछ पहले से तय है। उसी के अनुसार सब चलेगा। हालांकि इससे पहले पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह चिकित्सा शिक्षा मंत्री को इस मामले पर घेर चुके हैं। उन्होंने पूरी ट्रायल प्रक्रिया पर सवाल उठाया है। इसे लेकर मंत्री स्वास्थ्य प्रभुराम चौधरी भी सफाई दे चुके हैं।
यह है पूरा मामला
भोपाल के पीपुल्स अस्पताल में कोवैक्सिन का ट्रायल किया गया। इसमें शुरुआत 6 दिन में सिर्फ 45 वॉलंटियर को टीका लगाया गया था। इसके बाद अचानक संख्या बढ़ गई और एक महीने के अंदर 1700 से अधिक लोगों ने टीका लगवाया। चार दिन पहले यह मामला सामने आया। इसके बाद दैनिक भास्कर ने मौके पर पहुंचकर लोगों से बातचीत की। इसमें सामने आया कि यहां 600 से अधिक लोगों को टीका लगाया गया। पीपुल्स प्रबंधन पर आरोप लगे कि उन्होंने लोगों को सामान्य टीका लगवाने का कहकर कोरोना का टीका लगा दिया। इतना ही नहीं, किसी का ख्याल भी नहीं रखा गया। उनकी दोबारा जांच भी नहीं की गई। टीका लगने के बाद बड़ी संख्या में वॉलंटियर बीमार होने लगे थे।
दीपक ने 750 रुपए के लिए लगवाया टीका
दीपक के परिजन ने बताया, उन्होंने 750 रुपए के लिए टीका लगवाया था। उन्हें यह नहीं बताया गया था कि यह टीका ट्रायल के लिए है। वे लोगों के साथ टीका लगवाने अस्पताल चले गए थे। टीका लगवाने के बाद से ही उनकी तबीयत खराब हो गई थी। उसके बाद अस्पताल वालों ने सुध तक नहीं ली।
अनपढ़ को दे दिया फाॅर्म भरने
टीका लगवाने वाली राधा ने बताया कि वे पढ़ी लिखी नहीं हैं। टीका लगने के बाद से ही उन्हें आंसू आ रहे हैं। घबराहट हो रही है। अस्पताल से टीका लगवाने पर 750 रुपए मिले थे। राधा ने बताया कि उन्हें पढ़ना नहीं आता है। अस्पताल से एक किताब दी है। उन्होंने कहा था कि इसे रख लो। यह फाॅर्म टीका लगने के बाद शरीर में होने वाली समस्याओं को लिखना है। अब सवाल यह है कि अनपढ़ लोग इसे कैसे भरेंगे। अगर फाॅर्म भरा ही नहीं जाएगा, तो वैक्सीन के दुष्प्रभाव के बारे में कैसे पता चल सकेगा।
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