पांच वर्ष के बच्चे के यूरीनरी ब्लेडर में फंसी 19 एमएम की पथरी

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  • गरीब बच्चे के लिए मसीहा बनी डॉक्टरों की टीम, सांझा प्रयास रंग लाए

बैतूल। जिला अस्पताल में भर्ती एक पांच वर्ष के मासूम बच्चे के लिए जिले के निजी और शासकीय डॉक्टरों की टीम मसीहा बन गई। कई महीनों से यह बच्चा यूरीनरी ब्लेडर में पथरी की वजह से परेशान था। तकलीफ बढऩे पर जब बच्चे की दादी ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती किया तो उसे भोपाल रिफर कर दिया गया। गरीब दादी के पास बच्चों के लालन-पालन के ही पैसे नहीं है तो भोपाल ले जाकर ऑपरेशन कराना संभव नहीं था। ऐसे में बायो मेडिकल इंजीनियर वल्लभ खंडागरे बच्चे के उपचार का माध्यम बना। नवरात्रि के पहले दिन सर्जन डॉ रमेश काकोडिय़ा, जिला अस्पताल में पदस्थ सर्जन डॉ रणजीत राठौर, एनेथिस्यिा विशेषज्ञ डॉ चित्रकला पाटिल, सिस्टर सुनीता सोलंकी, वार्ड बॉय दिनेश सिंह एवं रमेश मालवीय की टीम ने सफलतापूर्वक शाम 6.30 बजे का ऑपरेशन शुरु किया। करीब पौन घंटे के ऑपरेशन में डॉ रणजीत सिंह ने करीब दो सेंटीमीटर (लगभग 18-19 एमएम) पथरी निकालने में सफलता हासिल की। मूलत: सिवनी मालवा निवासी इस बच्चे के ऑपरेशन के बाद दादी ने भी राहत की सांस ली है।
वल्लभ बना बच्चे के उपचार का माध्यम
जिला अस्पताल बैतूल में सिवनी मालवा निवासी पुनरिया बाई ने 15 अक्टूबर को अपने पांच वर्ष के पोते राज सोलंकी को भर्ती कराया था। राज की यूरीनरी ब्लेडर में पथरी होने और ऑपरेशन में रिस्क होने की वजह से उसे जिला अस्पताल से रेफर कर दिया था, लेकिन पुनरिया बाई अपने दो पोतो के साथ भोपाल जाने की स्थिति में नहीं थी। यह जानकारी जब मेडिकल इंजीनियर वल्लभ खंडागरे के संज्ञान में आई तो उसने इस संबंध में समाजसेवी गौरी पदम से स पर्क किया। राज के यूरीनरी ब्लेडर में फंसी पथरी की वजह से उसकी हालत गंभीर हो रही थी, यहां तक कि तीन दिनों उसे टायलेट भी नहीं हो पा रही थी। यह जानकारी जब श्रीमती पदम को मिली तो उन्होंने इस संबंध में डॉ रमेश काकोडिय़ा एवं रेडक्रास सोसायटी के अध्यक्ष डॉ अरुण जयसिंगपुरे से स पर्क कर पूरी जानकारी दी। इसके बाद बच्चे की मदद के लिए सभी एकजुट हो गए। बच्चे के ऑपरेशन के दौरान भी पूरे समय वल्लभ दादी का हौसला बढ़ाता रहा।
डॉ चित्रा ने दिया निश्चेतक, डॉ राठौर और डॉ काकोडिय़ा ने की सर्जरी
दो दिनों तक लगातार वल्लभ ने सभी डॉक्टरों से स पर्क किया। 14 अक्टूबर को जिला अस्पताल में भर्ती राज का एक्सरे एवं सोनोग्राफी डॉ रमेश काकोडिय़ा ने अपने अस्पताल में की। राज की रिपोर्ट डॉ जयसिंगपुरे ने डॉ रणजीत राठौर से सांझा की और डॉ काकोडिय़ा से भी ऑपरेशन के लिए चर्चा की। डॉ चित्रकला पाटील ने भी स्वयं तकलीफ में होने के बाद भी जिला अस्पताल पहुंचकर बच्चे को निश्चेतक दिया। पौन घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद ब्लेडर से पथरी निकाली गई। ऑपरेशन में सिस्टर सुनीता सोलंकी, वार्ड बॉय दिनेश सिंह एवं रमेश मालवीय का पूरा सहयोग मिला। डॉ राठौर ने बताया कि बच्चे के यूरीनरी ब्लेडर के पास एक गांठ और है। बहरहाल पथरी निकाल दी गई है। अब राज पूरी तरह खतरे से बाहर है।
ऐसे सिवनी से बैतूल पहुंची 70 साल की दादी
पुनरिया बाई ने बताया कि वह करीब 8 दिन पहले ही सिवनी के कुछ लोगों के साथ रोजी रोटी की तलाश में बैतूल आई है। राज को पहले भी वे सिवनी के अस्पताल में दिखा चुकी है, लेकिन उपचार के लिए पैसे नहीं थे। बैतूल आने के बाद अचानक उसकी तकलीफ बढ़ गई जिससे उसे जिला अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। राज की मां का उसे जन्म देने के छह महीने बाद ही निधन हो गया वहीं उसके पिता भी घर छोड़कर चले गए। पुनरिया बाई के दूसरे बेटे की भी मौत हो गई है जिसका भी करीब 6 वर्ष का एक बेटा शाहीद है। दोनों बच्चों की जिम्मेदारी अब पुनरिया बाई पर ही है। बैतूल में कोई काम मिल जाएगा इसी उम्मीद से वह सिवनी के लोगों के साथ बैतूल पहुंच गई। पुनरिया बाई के पास एक राशन कार्ड के अलावा कोई दूसरे दस्तावेज भी नहीं है। वह राज के ठीक होने के बाद अब फिर से सिवनी लौटना चाहती है। पुनरिया बाई ने कहा कि बैतूल के लोग और डॉक्टर उनके लिए भगवान की तरह है, जिन्होनें पोते की जान बचा ली।

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