सतपुड़ा प्रेस क्लब ने गणेश शंकर विद्यार्थी के छाया चित्र पर
सारनी। सतपुड़ा प्रेस क्लब के पत्रकारों ने पत्रकारिता के पुरजोधा गणेश शंकर विधार्थी के छाया चित्र पर पुष्पांजली अर्पित कर संगठित होकर कार्य करने का संकल्प लिया।
सतपुड़ा प्रेस क्लब के पत्रकारों ने पत्रकारिता की नीव रखने वाले पत्रकार गणेश शेकर विधार्थी को श्रद्धा सुमन अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। सतपुड़ा के पत्रकारों ने एक स्वर में कहा कि वर्तमान समय पत्रकारिता संक ट के दौर से गुजर रही है। इसकी वजह पत्रकारों का संगठित नहीं होने की वजह पत्रकारों पर प्रशासनीक अमला भारी हो रहा है।
सच्ची खबरे लिखने पर पुलिस द्वारा झूठे आरोपों में फंसाने की धमकी देना आम बात हो गई है। पत्रकारों ने कहा कि पत्रकारिता को बचाने और सरकार को आईना दिखाने के लिए पत्रकारों को एकजुट होने की जरुरत है।
एक लकउ़ी को कोई भी तोडऩे की बात करता है,लेकिन गठ्ठा बंधने पर लोग सोचने पर विवश हो जाते हैं। अक्षय जोशी ने कहा कि पत्रकार दिन भर खबरों की खेज के भाग दौंड में लगा रहता है,खबर कैसे निकली इसकी मालिकों को कोई मतलब नहीं लेकिन खबरों को काट-छाट कर छोटी कर देते हैं। रंजीत सिंह ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता का दौर गंभी चुनौतियों से गुजर रहा है। सरकार की योजनाओं की सटीक खबर से शासन प्रशासन को अवगत कराना चाहिए। ताकि उस खबर पर दोषियों पर कड़ी कार्यवाही हो सके। नन्हे चंद्रवंशी ने कहा कि पत्रकारीय जीवन में कई ऐसे पत्रकारों से मिलना हुआ जिनमें सरकार और समाज के ऐसे तबके से खबर तलाश लाने का हुनर है, जिसके बारे में हम आप सोच भी नहीं सकते इसकी वजह उसकी पैठ हर जगह है ऐसी पैठ हर कलमकार की होनी चाहिए अखबार छोटा बड़ा नहीं होता पत्रकार की लेखनी का स्तर बड़ा होना चाहिए। हिंदी में कोई ऐसी परंपरा नहीं कि संपादक उसकी खबरें वाजिब कीमत देकर खरीद सके पत्रकारिता का गिरता सतर को केवल पत्रकारों की कलम ही बता सकती है। पत्रकार के सामने चुनौतियां के साथ उनके भी परिवार है, उन्हें भी रोजी-रोटी की फिक्र है उनके सामने तीन रास्ते हैं, पहला, या तो वह सिस्टम का हिस्सा बन जाए और सरकारोन्मुखी पत्रकारिता का हुनर सीख ले अपने मालिकान के लिए अगर सरकारों से डील करना आप सीख गये तो फिर आप पत्रकारिता जगत के शहंशाह हैं दूसरा रास्ता है, हम जैसों का जो परिधि पर हैं परिवार है, इसलिए नौकरी करना जरुरी है मगर पहला रास्ता चुन नहीं सकते कभी सरकारोन्मुखी कर लेते हैं, बीच-बीच में जनोन्मुखी भी पुश करने की कोशिश करते हैं कुछ नहीं होता है। तीसरा रास्ता है, आप इस सिस्टम से आजाद हो जायें, या फिर आपको खुद आपका हाउस आजाद कर दे ।
कार्यक्रम में काली चौरासे, छविनाथ भारद्वाज,शंकर साहू,संजीव डोंगरे,राजेश प्रजापति,कैलाश पाटिल, सोनू सोनी,सेतोष कैथवार, ब्रजकिशोर भारद्वाज,कुबेर डोंगरे,भीमबहादुर थापा,राजेश राठौर, जोगेंद्रर सूर्यवंशी, सहित सतपुड़ा प्रेस क्लब के अन्य पत्रकार मौजूद थे।
पत्रकारों ने एक जुट होकर संगठित रहने का लिया संकल्प
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