- 50 साल से काबिज आदिवासी परिवार की भूमि की कथित फर्जी रजिस्ट्री का मामला भी चर्चा में
सारनी। घोड़ाडोंगरी तहसील कार्यालय में न्यायालयीन कार्यवाही के दौरान हंगामे और तहसीलदार को कथित रूप से धमकाने के मामले में नाम सामने आने के बाद संजय अग्रवाल एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गए हैं। क्षेत्र में चर्चा है कि उनके खिलाफ पहले से भूमि संबंधी गंभीर शिकायतें उठती रही हैं, जिनमें आदिवासी परिवार की भूमि की कथित फर्जी रजिस्ट्री का मामला भी शामिल है। जानकारी के अनुसार तहसील कार्यालय में चल रही सुनवाई के दौरान हुए विवाद के बाद पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घटना ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
आदिवासी की जमीन पर कब्जे का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि विनोद आदिवासी के परिवार का लगभग 50 वर्षों से जिस भूमि पर कब्जा और उपयोग रहा, उसी भूमि की कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रजिस्ट्री करा ली गई। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।
ग्रामीणों का दावा है कि भूमि पर वर्षों से खेती और उपयोग का रिकॉर्ड मौजूद है, इसके बावजूद स्वामित्व परिवर्तन की प्रक्रिया सवालों के घेरे में है।
राजस्व व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
मामले ने राजस्व अभिलेखों, नामांतरण प्रक्रिया और रजिस्ट्री की वैधता को लेकर भी कई प्रश्न खड़े कर दिए हैं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यदि शिकायतें सही हैं तो यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं बल्कि राजस्व व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी बड़ा सवाल है।
जांच की मांग तेज
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि भूमि से जुड़े सभी दस्तावेज, राजस्व रिकॉर्ड और रजिस्ट्री की प्रक्रिया की बारीकी से जांच कराई जानी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
अब संजय अग्रवाल के शासकीय भूमि पर कथित अतिक्रमण पर प्रशासन की नजर
तहसील कार्यालय में हुए विवाद और भूमि संबंधी शिकायतों के बीच अब प्रशासन की नजर संजय अग्रवाल द्वारा शासकीय भूमि पर किए गए कथित अतिक्रमण के आरोपों पर भी टिक गई है। सूत्रों के अनुसार राजस्व विभाग को क्षेत्र में शासकीय भूमि के उपयोग और कब्जे को लेकर शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि शासकीय भूमि पर लंबे समय से कब्जा कर उसका निजी उपयोग किया जा रहा है। शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से सीमांकन कराकर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करने तथा अतिक्रमण पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। राजस्व अधिकारियों का कहना है कि प्राप्त शिकायतों और उपलब्ध अभिलेखों का परीक्षण किया जा रहा है। यदि जांच में शासकीय भूमि पर अतिक्रमण की पुष्टि होती है तो मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि शिकायतों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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