गैर आदिवासी कौड़ियों के दाम खरीद रहे आदिवासियों की जमीन: रामचरण इरपाचे

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  • युवा आदिवासी विकास संगठन निपान्या भैंसदेही ने की पड़ापेन स्थापना, निकाली कलश यात्रा

भैंसदेही। युवा आदिवासी विकास संगठन निपान्या के तत्वाधान में पड़ापेन स्थापना के अवसर पर ग्राम निपान्या में अभिनव कार्यक्रम आयोजित किया गया। सर्वप्रथम ग्राम में भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जो प्रमुख मार्गो से होते हुए वापस कार्यक्रम स्थल पर पहुंची। यहां पड़ापेन की स्थापना की गई, वहीं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान नृत्य दलों ने मनमोहक प्रस्तुति दी और सिवनी से आए स्वरलहरी रामस्वरूप उइके ने अपनी जादुई आवाज से सभी श्रोताओं का मन मोह लिया।कार्यक्रम में मुख्यातिथि के रूप मे युवा आदिवासी विकास संगठन बैतूल के संरक्षक और जनपद अध्यक्ष आठनेर रामचरण इरपाचे, संस्थापक युवा आदिवासी विकास संगठन प्रदीप उइके, संचालक    एमसीआई डॉ राजा धुर्वे, प्रदेश अध्यक्ष रामु टेकाम, भुमका संघ दादा सोनू इवने, डॉ रमेश काकोड़िया, समस्त आदिवासी समाज संगठन बैतूल के दिलीप धुर्वे, जिला अध्यक्ष मुन्नालाल वाडिवा, युवा आदिवासी विकास संगठन आठनेर ब्लॉक अध्यक्ष जयचंद सरियाम, कार्यवाहक अध्यक्ष सुभाष उइके, युवा आदिवासी विकास संगठन भैंसदेही ब्लॉक अध्यक्ष नंदू अहाँके, कार्यवाह नंदू उइके, संरक्षक जस्सू धुर्वे, ईश्वर धुर्वे उपस्तिथ थे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रामचरण इरपाचे ने कहा कि आज आदिवासी समाज भले ही सो रहा हो मगर सोते हुए भी, एक आँख खोलकर देखने लगा है। लिहाजा देखने पर पता चला की देश में २६ प्रतिशत आदिवासी के हक की भूमि ६ प्रतिशत कैसे हो गई। गैर-आदिवासी आदिवासी की जमीने कवड़ियों के भाव से आदिवासियों के नाम से खरीद लेते है, उसके बाद उसी जमीनों को प्लॉटिंग के बहाने करोड़ों कमाते है और कई जुगाड़ लगाकर उस जमीन को गैर-आदिवासीओ के नाम कर लेते है। इसी तरह सोते हुए एक आँख खोलकर देखने पर पता चला सम्पूर्ण देश की आदिवासी हक की २६ प्रतिशत जमीने गैर-आदिवासीओ को २० प्रतिशत हस्तांतरित हो चुकी है।
शिक्षा के प्रति ग्रामीणों को किया जागरूक
इस दौरान रामू टेकाम ने अपने वक्तव्य में कहा की आदिवासी समाज की संस्कृति जिन्दा रहेंगी तो आदिवासी जिन्दा रहेगा। हमें अपने संस्कृति को बचाना चाहिए। वहीं डॉ राजा धुर्वे ने ग्रामीणों को जागरूक करते हुए बताया कि शिक्षा और सोच आपकों नई ऊंचाई, नया सवेरा दिखा सकता है। आप शिक्षा की ओर भागोंगे भाग्य आपका पीछा करेंगा। मेहनत से भाग्य बदलता है, भाग्य से किस्मत नहीं।मुन्नालाल वाडिवा ने कहा हमें पूर्व व्यवस्थाओं को पुनः स्थापित करना होंगा। बड़े-छोटो का सम्मान करना होंगा। आज गांव में फुट पड़ गई कोई किसी की सुनना नहीं चाहता, फिर गांव का विकास कैसे होंगा। इस अवसर पर जयचंद सरियाम ने कहा कि आदिवासी युवा जाग गया तो मंजर बिरसा मुंडा के सिद्धांत वाला होंगा, जिसमें तूफान भी होंगा और जीत भी। सुभाष उइके ने समाज को नशे की लत से दूर रहने का आहान किया, वहीं दिलीप धुर्वे ने कहा की आज आदिवासी समाज को प्रलोभन दिखा कर गैर-आदिवासी संगठन टुकड़ो में बांटना चाह रही है। मगर उनके मनसूबे हम कतई पूरा नहीं होने देंगे। इस अवसर पर युवा आदिवासी विकास संगठन निपान्या के कैलाश परते, गुरुदेव बारस्कर, प्रकाश उइके, सरपंच नंदूलाल इवने, रमेश धुर्वे, फूलचंद धुर्वे, मनीष टेकाम, मोनू धुर्वे, विजय धुर्वे, शिवदीन परते, जयपाल इवने, नीलकमल परते, दशरथ परते, विनोद उइके, मातृ-शक्ति सरस्वती परते, रमिया धुर्वे, कलावंती धुर्वे, सुखवंती धुर्वे, मुन्नी परते, रुंदा परते, रामरती उइके, सुमरनी उइके, बसिया इवने सहित आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

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