- आरईएस विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल

आमला। वर्षा जल संरक्षण के लिए पंचायतों में अमृत सरोवर बनाये गये। इन सरोवरों का उद्देश्य इससे जहां भूमिगत जलस्तर में वृद्धि है, वहीं दूसरी ओर मवेशियों, सिंचाई, मछली पालन और निस्तार के लिए पानी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है, लेकिन सरोवरों के निर्माण में अनदेखी और गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े होने लगे है, जिसके पीछे मुख्य कारण इन सरोवर से निरंतर पानी का रिसाव है। ग्राम उमरिया में सरोवर के ऐसे ही हाल है, जहां अमृत सरोवर से लगातार पानी बह रहा है। यहीं स्थिति रही तो आने वाले गर्मी के सीजन तक सरोवर पूरी तरह से सूख जायेगा। ग्रामीण सोमा पहाड़े, सुनीता पहाड़े, यमुना चौहान ने बताया कि आरईएस विभाग के माध्यम से 13 लाख रूपये की लागत से अमृत सरोवर का निर्माण किया गया है। सरोवर बनने को मात्र एक माह का समय बीता है और सरोवर से निरंतर पानी बहने लगा है। जिससे ग्रामीणों में आक्रोश है, वहीं सरोवर की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे है। ग्रामीणों का आरोप है कि निरंतर पानी के बहाव से मिट्टी बह रही है। ग्रामीणों के अनुसार सरोवर से निरंतर पानी बहता रहा तो टूटने की आशंका बनी रहेगी। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से उक्त सरोवर में की गई लापरवाही की जांच और दोषियों पर कार्रवाही की मांग की है।
ग्रामीणों ने लगाया निर्माण में भ्रष्टाचार का आरोप
ग्रामीणों ने अमृत सरोवर के निर्माण में लापरवाही और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। ग्रामीण रणवीर चौहान, सोनू मालवीय, ईश्वर धुर्वे, दयाल सिंह चौहान का कहना है कि अमृत सरोवर के निर्माण में मानक मापदंडो का ध्यान नहीं रखा गया। अधिकारियों ने निर्माण में जमकर भ्रष्टाचार किया है। जिसके परिणाम स्वरूप एक माह पहले बने सरोबर से पानी बहने लगा है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि विभाग द्वारा सरोवर निर्माण में पत्थरीली मिट्टी का उपयोग किया गय है। जिससे पानी थमने के बजाए बहने लगा है। यदि शीघ्र ही पानी को रोकने के इंतजाम नहीं किये गये तो सरोवर का पूरा पानी बह जायेगा और सरोवर सूख जायेगा।
चंद महीने बाद नजर आने लगा घटिया निर्माण
ग्राम उमरिया के पास बने अमृत सरोवर को अभी एक ही महीना हुआ है और सरोवर से पानी बहने लगा है। जिससे सरोवर के निर्माण में घटिया मटेरियल और अधिकारियों की लापरवाही साफ नजर आने लगी है। ग्रामीण सुनीता पहाड़े, सोमा पहाड़े, दयाल सिंह चौहान ने बताया कि सरोवर के निर्माण के वक्त भी अधिकारियों ने जल्दबाजी की। निर्माण में किस तरह के मटेरियल का उपयोग हो रहा है, इसका बिल्कुल ध्यान नहीं दिया। जबकि मिट्टी और बोल्डर की जगह पथरीली मिट्टी की दीवार खड़ी की गई है। जिससे पत्थरों के कारण सरोवर से पानी बहने लगा है। इससे भविष्य में सरोवर के बहने की आशंका बनी हुई है।
आरईएस विभाग की कार्यप्रणाली पर उठने लगे सवाल
पंचायतों में ग्रामीण यांत्रिकी विभाग (आरईएस) द्वारा ब्लाक की अनेक पंचायतों में अमृत सरोवर का निर्माण कराया है। लेकिन इन निर्माण कार्यो की गुणवत्ता की पोल खुलने लगी है। उमरिया में जहां अमृत सरोवर से निरंतर पानी बह रह है, वहीं कुछ दिनों पूर्व आरईएस विभाग द्वारा ही जामदेही कला पंचायत के ग्राम मंगारा की सीमा पर बनाए गए जलाशय के बंड को तोड़कर नई वेस्टवियर पानी निकालने बनाई गई है। जबकि जलाशय निर्माण के समय वेस्टवीयर दूसरी बनाई गई थी। जलाशय बचाने विभाग के उपयंत्री द्वारा मशीन लगाकर डेम का बंड तोड़कर नई वेस्टवियर निर्माण करवाई गई। इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि विभाग के अधिकारियों ने निर्माण के वक्त कितना ध्यान दिया होगा?
इनका कहना है..
पानी निकलने के लिए फिल्टर बनाया जाता है। यहां इश्यू यह है कि पानी थोड़ा ज्यादा आ रहा है। इसका ट्रीटमेंट कराया जायेगा। सरोवर कच्चा होने या टूटने जैसी बात नहीं है। पानी साफ आ रहा है, इसका मतलब पानी फिल्टर होकर निकल रहा है।
सविता राय, एसडीओ, आरईएस विभाग, आमला
+ There are no comments
Add yours