- बच्चे अपराधी नहीं है, अपराधी वह है जिन्होंने बच्चे को धन आयता दे दिया
- अच्छाई के लिए आगे बढ़ेंगे तो निंदा होगी: पं.शर्मा
- राम कथा के तीसरे दिन अवतार के कारण, भगवान राम जन्म की सुनाई कथा
बैतूल। श्री कृष्ण पंजाब सेवा समिति के तत्वाधान में रामलीला मैदान गंज में आयोजित श्री राम कथा के तीसरे दिन रविवार पंडित सुखदेव शर्मा ने अपने मुखारविंद से अवतार के कारण एवं राम जन्म की कथा सुनाई। पंडित शर्मा ने कथा में पुरुषोत्तम राम की लीलाओं का जीवंत वर्णन किया। कथा के दौरान पंडित सुखदेव शर्मा ने भगवान शिव माता पार्वती की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि शिवजी के कंठ में विष है, माता पार्वती ने राम जी के अवतार लीला श्रवण करना चाहा, उन्होंने श्रोताओं को बताया शिव जी कंठ में विष रखकर प्रेम अमृतमई कथा सुनाते हैं। इसलिए जो वक्ता हो उसे सबसे पहले निंदा सहन करनी पड़ेगी, वक्ता को विष पीना ही पड़ेगा, अच्छाई के लिए आगे बढ़ेंगे तो निंदा होगी। इसका उदाहरण देते हुए पंडित शर्मा ने कहा कितना भी सुंदर खाना खाओ, ब्यूटी पार्लर जाओ लेकिन सुंदर आपकी सहनशीलता, तपस्या से ही दिखाई देगी। उन्होंने बताया जिन लोगों के पास पिता दादा की संपत्ति होती वह भजन नहीं कर पाते। फिर उनके बच्चे पिता की दुकान नही आते सुबह से पिताजी बैठे रहते हैं। इसी प्रकार बड़ी खेती वाले किसान के बच्चे खेती नहीं कर पाते, लेकिन उनका पिता कर कर के मर जाता है और तीसरी पीढ़ी के लोग मजा मारते हैं, फिर उनकी आने वाली पीढ़ी भीख मांगती है, पंडित शर्मा ने कहा इन सब घटनाक्रम में बच्चे अपराधी नहीं है, अपराधी वह है जिन्होंने बच्चे को धन आयता दे दिया है। उन्होंने कहा आप इतना करो कि बच्चे बैठकर ना खाए। उन्होंने धन के सदुपयोग पर बल देते हुए कहा कि धन है तो धर्मशाला बनवाओ, कथा करवाओ, प्याऊ लगाओ। उन्होंने कहा यही सब परमार आपके साथ जाएगा, शरीर का उपयोग केवल परमार्थ के लिए ही किया जाना चाहिए क्योंकि आपके जाने के 13 दिन बाद फोटो की पूजा करके नेम प्लेट लगा देंगे। उन्होंने कहा तुलसी जी ने लिखा है जिन्होंने कथा नहीं सुनी उनके कान सर्प के रहने का घर है, उनके नेत्र मोर पंख पर दिखने वाली आंख की तरह है। उनका सिर तुमरी के समान जो बहुत कड़वी रहती। उसी के समान है भगवान की कथा मंगल के भवन अमंगल को हरण करने वाली है और कलयुग में पाप के काटने वाली कुल्हाड़ी है। भगवान सगुन और अगुन दोनों एक है, बर्फ और पानी में कोई भेद नहीं होता, सर्वव्यापक आकार लेता तो वह अवतार हो जाता, फिर वही निराकार हो जाता है। पंडित शर्मा ने कहा धर्म की स्थापना करो, उन्होंने कहा जो व्यक्ति आश्रम धर्मस्थल में कब्जा, संतो माता-पिता को कष्ट दे, गांव देश का अहित चाहे वह असुर ही है। भगवान असुरों को मारने नहीं लेकिन सज्जनों की रक्षा करने आते हैं, पहले रावण आया फिर राम आए, पहले रोग फिर औषधि आती है, पहले अंधेरा फिर उजाला आता है। उन्होंने भगवान श्री राम के नाम की महिमा बताते हुए कहा रा-अर्थात राष्ट्र, म- अर्थात मंगल करने वाले, रा अर्थात राक्षस, म अर्थात मारने वाले। उन्होंने कहा भगवान श्री राम के नाम में ही जीवन का सार है। श्री राम कथा में आजबाल लीला के साथ ताड़का वध, अहिल्या उद्धार, पुष्प वाटिका, धनुष भंग की कथा सुनाई जाएगी। आयोजन समिति ने बताया कि 16 से 25 अक्टूबर तक प्रतिदिन शाम 7:00 से 9:00 बजे तक राम कथा का आयोजन किया जा रहा है।