सारनी। मध्य प्रदेश पर्यटन निगम के आउट सोर्स के 562 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया, वही स्थायी कर्मचारियों का 40 प्रतिशत वेतन कटौती किये जाने का जो तर्क दिया गया है वह न्याय संगत नही है, ऐसा कहते हुए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डॉ. कृष्णा मोदी ने बताया कि पूरे देश में कोविड-19 होने के कारण आपदा अधिनियाम 2005 को प्रावधानों के तहत सभी सेवाओं को प्रतिबंधित केन्द्र शासन द्वारा लिया गया निर्णय के पालन के तहत केन्द्र सरकार एवं देश के निजी सेक्टर के उद्योग धंधे, लघु ईकाईयों को बंद किया गया। साथ ही केंद्र शासन ने अपने अधीनस्थ एवं राज्यों के अधीनस्थ समस्त शासकीय एवं अशासकीय संस्थानों के कर्मचारियों को उनके हितों का कठोरघात नहीं हो, उनके परिवार को आर्थिक पीड़ा का सामना नही करना पड़े विपदा की घड़ी में उनके वेतन भत्ते आदि का भुगतान समय पर किया जाना सुनिश्चित किया गया। आदेश निर्देश जारी किये गये और उसका पालन नही होने पर नियमानुसार कार्यवाही किये जाने का
प्रावधान भी सुनिश्चित किया गया। आपदा से निपटने के लिए केन्द्र शासन द्वारा 20 लाख करोड़ का भारी भरकम बजट हर सेक्टर शासकीय, अशासकीय संस्थाओं, नागरिकों को आर्थिक एवं मुलभुत सुविधा उपलब्ध कराने के लिए दिया गया। इन सबके बावजुद मध्यप्रदेश पर्यटन निगम के आउट सोर्स 562 कर्मचारियों को नौकरी से निकालना एवं स्थायी कर्मचारियों के वेतन में 40 प्रतिशत कटौती किये जाना, निश्चित रूप से केन्द्र शासन और आपदा अधिनियम 2005 के प्रावधानों का उल्लंघन है। प्रदेश के सभी कर्मचारियों, प्रतिनिधि निगम मंडल के कर्मचारियों और समस्त सामाजिक संस्थाएं तथा श्रमिकों के हितो में देश ट्रेड युनियन के प्रतिनिधियों से निवेदन है कि इस संकट की घड़ी में आदेश निर्देश पर्यटन निगम प्रबंध द्वारा हठधर्मिता पूर्ण किये जा कर तर्क प्रस्तुत किये है वह न्याय उचित नहीं है। इसलिए पर्यटन निगम प्रबंध के लिए गये निर्णय का सामूहिक रूप से होकर सभी को विरोध करना चाहिए और लिये गये निर्णय को वापस लेने हेतु जिम्मेदारों को विचार करना चाहिए और जो अनुचित निर्णय लिया है उसे वापस लेना चाहिए। यदि समय रहते गलत नीति-रीति निर्णय का विरोध नही किया गया तो जो स्थिति पर्यटन निगम के कर्मचारियों की हुई है वही स्थिति प्रदेश के अन्य निगम मंडलों शासकीय कर्मचारियों की होगी।

By Vishal

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