सारनी। सार्वजनिक उद्योगों का निजीकरण, श्रम कानून में बदलाव और एफडीआई के मजदूरों के शोषण वाली नीति के विरोध श्रमिक संगठनों ने एकजुट होकर भारत के प्रधानमंत्री के नाम वेकोलि महाप्रबंधक को शुक्रवार को 17 सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। इस दौरान सभी संयुक्त मोर्चे के पदाधिकारी एवं सदस्यों ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए ज्ञापन सौंपा और विरोध प्रदर्शन भी किया। संयुक्त मोर्चा (इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू) ने के सदस्यों ने बताया कि वर्तमान केन्द्र की सरकार देश में बुनियादी ढांचा को और देश के पूंजीपतियों को खुली छूट देने के उद्देश्य से लगातार श्रम कानून पब्लिक सेक्टर और एफडीआई के तहत् भारी परिवर्तन लाकर देश की मेहनतकश जनता पर हमले कर रही है। जिससे देश की अधिकांश आबादी पर गुलामी का खतरा मंडराने लगा है, जो लोकतंत्र के लिये खतरा है और श्रमिकों के काम करने की अवधि मध्यप्रदेश एवं अन्य राज्यों में 8 घंटे से 12 घंटे करना श्रमिकों को गुलामी की प्रथा की ओर ले जाना इसका जीता जागता उदाहरण
है। जैसा कि देश के करोड़ों लोगों ने आपको और आपके दिये गये भरोसेमंद वायदों की अच्छे दिन आने वाले हैं, पर भरोसा कर आपकों देश का मुखिया बनाया। किन्तु आपके द्वारा देश के 95 प्रतिशत आबादी के भविष्य की अनदेखी कर उनके विरुद्ध निर्णय लिया जा रहा है। जो कि लोकशाही और लोकतंत्र पर हमले के साथ-साथ खतरा भी है। जिसके विरोध स्वरूप हमने 17 सूत्रीय मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन का मुख्य महाप्रबंधक तो प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन सौपते हुए इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू के पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे।

By Vishal

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