• श्रमिक स्पेशल ट्रेनों को चलाने के लिए राज्यों से सहमति की जरूरत नहीं; इनसे करीब 21 लाख मजदूर घर पहुंचे
  • श्रमिक स्पेशल ट्रेनों को चलाने के लिए गृह मंत्रालय ने अपने नियमों में बदलाव किया
  • अब तक सभी ट्रेनें राज्यों की मांग पर चलाई जा रही थीं, इसमें 85% खर्च रेलवे उठाता था

नई दिल्ली. लॉकडाउन के बीच जल्द ही रेल यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को ट्वीट किया- 1 जून से रोजाना 200 नॉन एसी टेनें चलाई जाएंगी। जल्द ही इन ट्रेनों का टाइम टेबल जारी कर ऑनलाइन बुकिंग शुरू होगी। गोयल के मुताबिक, रेलवे ने 19 दिनों में श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के जरिए करीब 21 लाख मजदूरों को उनके राज्यों तक पहुंचाया है। उन्होंने राज्य सरकारों से अपील की है कि वह प्रवासी मजदूरों का रजिस्ट्रेशन करें और इसकी लिस्ट रेलवे को दें। श्रमिक ट्रेनों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी।

रेलवे के प्रवक्ता राजेश बाजपेयी ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत श्रमिक विशेष ट्रेनों को चलाने के लिए संबंधित राज्यों की सहमति की जरूरत नहीं होगी।
 
गोयल ने बताया- सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश के लिए 837 ट्रेनों की मंजूरी दी  
इससे पहले रेल मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट में बताया, ‘पश्चिम बंगाल, झारखंड और छत्तीसगढ़ इन ट्रेनों को मंजूरी देने के मामले में पीछे हैं।’ उन्होंने 1 मई से शुरू हुईं श्रमिक ट्रेनों की जानकारी साझा की।

अभी तक क्या हो रहा था? 

  • पहले यह ट्रेनें राज्य सरकार की मांग पर चल रही थीं। इस दौरान गृह मंत्रालय की गाइडलाइन का पूरा पालन किया जा रहा है। कोच में यात्रियों को सोशल डिस्टेंसिंग के साथ बैठाया जा रहा है। रवानगी और संबंधित स्टेशन पर पहुंचने पर उनकी थर्मल स्क्रीनिंग की जाएगी।
  • गृह जिले में 14 दिन क्वारैंटाइन करने के बाद ही उन्हें घर भेजा जाएगा। लोगों को भेजने वाली और बुलाने वाली राज्य सरकारों के आग्रह पर ही विशेष ट्रेनें चलेंगी। शुरुआती और आखिरी स्टेशन के बीच में ट्रेनें कहीं नहीं रुकेंगी। श्रमिकों को ट्रेन में बैठाने से पहले स्क्रीनिंग करवाना राज्य सरकार की जिम्मेदारी होगी। जिन लोगों में लक्षण नहीं होंगे, उन्हें ही जाने की इजाजत मिलेगी।

श्रमिक स्पेशल ट्रेनों को लेकर दो विवाद हुए 

  • पहला- मजदूरों के किराए पर : कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार मजदूरों से ट्रेन का किराया ले रही है, जो कि शर्मनाक है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कांग्रेस की सभी प्रदेश यूनिट से कहा था कि वे मजदूरों के टिकट का खर्च वो उठाएं। इसके बाद  स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि श्रमिक ट्रेनें राज्यों की डिमांड पर चलाई जा रही हैं और इसमें यात्रा का 85 फीसदी खर्च केंद्र सरकार उठा रही है, जबकि 15 फीसदी राज्य सरकारों को देना है।
  • दूसरा- राज्य ट्रेनें चलाने की अनुमति नहीं दे रहे: सबसे पहले आरोप पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर लगा था। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि ममता ट्रेनों की मंजूरी न देकर मजदूरों के साथ अन्याय कर रही हैं। इसके बाद खुद रेल मंत्री पीयूष गोयल ने भी ऐसे ही आरोप लगाए थे। उधर, ममता बनर्जी ने कहा था कि केंद्र सरकार मजदूरों की घर वापसी पर राजनीति कर रही है।

By Vishal

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