भोपाल. मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आज तक चैनल से कहा- वो राज्य में अपनी सरकार इसलिए नहीं बचा सके, क्योंकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने उनमें झूठा विश्वास भर दिया था कि पार्टी के कुछ विधायक साथ छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे। कमलनाथ ने कहा, “यह जानबूझकर नहीं किया गया था, लेकिन स्थिति को ठीक समझ नहीं पाने की वजह से ऐसा हुआ। दिग्विजय सिंह ने महसूस किया कि कुछ विधायक जो दिन में तीन बार उनसे बात कर रहे थे, वो कभी पार्टी का साथ नहीं छोड़ेंगे लेकिन उन्होंने वैसा ही किया।”
कमलनाथ ने बाद में अपने बयान का खंडन करते हुए कहा कि “मेरी सरकार गिरने के मुद्दे पर बात आने पर पर मैंने चैनल से कहा- “स्वयं मुझको और दिग्विजय सिंह को कुछ विधायकों ने झूठा विश्वास दिलाया था कि वह वापस लौट आएंगे, उनके झूठे विश्वास पर हम दोनों ने भरोसा किया और हम अपनी सरकार नहीं बचा पाए। यह चर्चा अनौपचारिक थी और इसमें कहीं भी मैंने यह नहीं कहा कि दिग्विजय सिंह ने झूठा विश्वास भरा था, इसके कारण सरकार नहीं बची।”
सिंधिया पर कमलनाथ ने कहा- वह जुलाई से भाजपा के संपर्क में थे
कमलनाथ ने कहा, “जहां तक ज्योतिरादित्य सिंधिया का सवाल है, मुझे पता था कि लोकसभा चुनाव हारने के बाद वह जुलाई से भाजपा के संपर्क में हैं। वह इस बात को कभी पचा नहीं पाए कि वह एक लाख से अधिक वोटों से लोकसभा चुनाव हार गए और वो भी उस उम्मीदवार से जो कांग्रेस का साधारण कार्यकर्ता था और जिसे भाजपा ने अपने पाले में लेकर उनके खिलाफ चुनाव में उतारा था। सिंधिया अपनी हार के बाद बीजेपी के संपर्क में थे, लेकिन बीजेपी की राज्य इकाई ने उन्हें कभी नहीं चाहा। लेकिन भाजपा अंततः उन्हें ले गई, क्योंकि बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व किसी भी कीमत पर मध्य प्रदेश से दूसरी राज्यसभा सीट चाहता था।”
20 मार्च को अल्पमत में आने के बाद गिर गई थी कमलनाथ सरकार
सिंधिया समर्थक 22 विधायकों के पार्टी से इस्तीफा देने के कारण अल्पमत में आई कमलनाथ की सरकार 20 मार्च को गिर गई थी। इसके बाद 23 मार्च को शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में चौथी बार शपथ ली थी। शिवराज ने शपथ लेने के 28 दिन बाद 21 अप्रैल को मंत्रिमंडल का गठन किया था। इसमें 5 मंत्री शामिल हैं।
कमलनाथ का दावा- उपचुनावों में 15 से ज्यादा सीटें जीतेगी कांग्रेस
मध्य प्रदेश उपचुनावों में कांग्रेस की वापसी पर कमलनाथ ने कहा, “यह आंकड़ों का खेल है। अभी हमारे पास 92 विधायक और उनके पास 107 हैं। 24 सीटों के लिए उपचुनाव होने हैं, इसलिए हमें उनमें से कम से कम 15 सीटें भाजपा के बराबर आने के लिए जीतनी होंगी। फिर बाकी 7 विधायकों का काम 4 निर्दलीय, दो बसपा और एक सपा मिलकर करेंगे। स्थितियां अभी ऐसी हैं कि हम 15 से ज्यादा सीटें जीतेंगे। “