बैतूल। बैतूल के पूर्व जिला अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक के मेधावी पुत्र आयुष आर्य ने सफलता की एक और सीढ़ी को पार कर लिया है। नागपुर विश्वविद्यालय में एमबीबीएस के बाद पीजी की डिग्री करने पहुंचे आयुष को शनिवार प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने का अवसर मिला। आयुष अब करीब एक वर्ष तक बांड पर अपनी सेवाएं देंगे। इसके बाद संभावनाएं हैं कि वे जिला अस्पताल बैतूल में भी पदस्थ हो सकते हैं। अपने जिले में सेवा करने की उनकी भी दिली इच्छा है।
बैतूल से प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के बाद मेधावी आयुष ने अपने पिता पूर्व विधायक अलकेश आर्य के मार्गदर्शन में चिकित्सा क्षेत्र में जाने का निर्णय लिया था। उन्होंने इंदौर के प्रसिद्ध एमजीएम कालेज में एमबीबीएस की डिग्री हासिल की थी। यह परीक्षा भी उन्होंने प्रदेश के टॉप विद्यार्थियों में शामिल होकर उत्तीर्ण की थी। इसके बाद उन्होंने रेडियोलाजिस्ट में स्नाकोत्तर डिग्री हासिल करने के लिए नागपुर के प्रख्यात शासकीय महाविद्यालय को चुना।
करीब 3 वर्ष तक पीजी की डिग्री हासिल करने के लिए उन्होंने परीक्षा दी। बीते शनिवार नागपुर विश्वविद्यालय ने परिणाम घोषित किया। यहां अध्यनरत करीब 13 विद्यार्थी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए। बैतूल के पूर्व विधायक अलकेश आर्य के पुत्र आयुष ने यह परीक्षा उत्तीर्ण कर जिले का नाम रोशन किया है।
आयुष बैतूल में पदस्थ हुए तो होगी कमी पूरी
रेडियोलाजिस्ट में पीजी की डिग्री हासिल करने के बाद आयुष 1 वर्ष तक बांड पर रहेंगे। इसके बाद वे किसी अच्छी जगह पर पदस्थ हो सकते हैं, लेकिन उनके पिता अलकेश आर्य और आयुष की अपने जिले में सेवाएं देने की इच्छा है। चूंकि जिला अस्पताल में डॉ ओपी यादव करीब डेढ़ वर्ष पहले सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इसके बाद से किसी रेडियोलाजिस्ट की नियुक्ति नहीं हो पाई है। अभी भी जिला अस्पताल में मरीजों को बाहर से सोनोग्राफी करवाना मजबूरी बनी है। यदि पीजी डिग्री के बाद प्रयास किए जाए तो आयुष की पदस्थापना जिला अस्पताल में कराने से आदिवासी बाहुल्य जिले में रेडियोलाजिस्ट की कमी पूरी हो सकती है। मरीजों को राहत मिल जाएगी।
पूर्व विधायक अलकेश के बेटे आयुष आर्य की एक और उपलब्धि, पीजी की डिग्री प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण
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