बैतूल। साेमवार से कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा की शिव पुराण कथा की शुरुआत हुई। कोसमी में कथा करते हुए पं. मिश्रा ने कहा कि भगवान को अपने भक्तों को तलाश करने में समय नहीं लगता है। वह किसी न किसी रूप में उसके पास तक पहुंच ही जाते हैं, इसलिए सात दिनों तक बैतूल की धरती पर हो रही श्री शिवमहापुराण कथा में पूरी तरह से लीन हो जाए। 7 दिन यदि हम तन, मन और चित्त से भक्ति में डूब गए तो समझना भगवान भोलेनाथ की कृपा हो गई है।

ताप्ती पूजन के बाद शुरू हुई कथा
पं. प्रदीप मिश्रा जैसे ही व्यास पीठ पर पहुंचे, उन्होंने सबसे पहले सूर्य पुत्री मां ताप्ती की पूजा अर्चना की। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु रात में ही पहुंच गए थे। इसके अलावा सोमवार को भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा स्थल पर पहुंचे। पंडित मिश्रा ने कहा कि हम सभी मंदिर जाते हैं। भजन कीर्तन करते हैं। शिवमहापुराण की कथा कहती है कि हमें यह ज्ञात नहीं था हमें एक लोटा जल चढ़ाने का क्या फल मिलेगा? एक लोटा जल महादेव को चढ़ाने से 33 कोटि देवी देवताओं का अभिषेक हो जाता है यह हमें ज्ञात नहीं था। जब हमने भगवान शंकर को जाना तो भोलेनाथ की भक्ति के बल पर हमें ज्ञान हुआ कि भगवान का स्मरण करने का फल क्या मिलता है।

धन का सदुपयोग करने से बढ़ता है धन
पं. मिश्रा ने धन की व्याख्या करते हुए कहा कि ईश्वर सभी को धन भी देता है। धन का सद्पयोग करने से धन बढ़ता है, जबकि गलत उपयोग करने से घट जाता है। धन का धर्मार्थ में, परिवार की जरूरतों को पूर्ण करने में उपयोग किया जाए तो यह बढ़ता है,लेकिन इसे गलत तरीके से खर्च किया जाए तो इसका घटना प्रारंभ हो जाता है। इसी के साथ उन्होंने दूसरा उदाहरण देते हुए समझाया कि ईश्वर ने नेत्र दर्शन करने के लिए दिए हैं। अच्छा पढ़ने के लिए दिए हैं, लेकिन जब इनका गलत उपयोग किया जाता है तो इसके दुष्परिणाम भी भुगतने होते हैं।

By Vishal

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