भोपाल. मध्य प्रदेश में 28 विधानसभा सीट पर उप चुनाव के बाद अब बीजेपी और कांग्रेस का मुकाबला नगरी निकाय चुनाव में होगा. लंबे समय से अटके नगरी निकाय चुनाव को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है. बीजेपी और कांग्रेस ने नगरी रणनीति बनाना शुरू कर दिया है.बीजेपी ने बड़ा फैसला लेते हुए नगरीय निकाय चुनाव में उम्र के बंधन को खत्म करने का फैसला लिया है. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने कहा है नगरीय निकाय चुनाव में उम्मीदवार के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं होगी. जिताऊ उम्मीदवार पार्टी का प्रत्याशी होगा.
नगरीय निकाय चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस की अग्निपरीक्षा होगी. इससे पहले प्रदेश के 16 नगर निगमों में बीजेपी का कब्जा था. 15 नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस का था जबकि एक सिंगरौली नगर निगम में बीएसपी का नेता प्रतिपक्ष था. सभी नगरीय निकायों का कार्यकाल खत्म हो चुका है. प्रदेश में 278 नगरीय निकायों में सरकार ने प्रशासक नियुक्त कर दिए हैं.चुनाव के जरिए फिर से चुने हुए जनप्रतिनिधियों को बैठाने की तैयारी शुरू होती नजर आ रही है.
खर्च की सीमा तय
नगरी. निकाय चुनाव के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनावी खर्च की सीमा तय कर दी है. साल 2011 की जनगणना के मुताबिक 10 लाख से ज्यादा जनसंख्या वाले नगर निगम में महापौर पद के लिए खर्च की सीमा 35 लाख रुपए और 10 लाख से कम जनसंख्या वाले नगर निगम के लिए 15 लाख रुपए की सीमा रहेगी. इसी तरह एक लाख से ज्यादा जनसंख्या वाली नगर पालिका परिषद के लिए चुनावी खर्च की सीमा 10 लाख रुपए और 50 हजार से 1 लाख के बीच की पालिका के लिए ₹6 लाख खर्च सीमा तय की गई है.
चुनाव की तैयारी पूरी
प्रदेश में नगरीय निकायों में अभी परिसीमन की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है. हालांकि राज्य सरकार ने पिछली सरकार के फैसले को बदलते हुए यह तय कर दिया है कि चुनाव में महापौर और अध्यक्ष का चुनाव सीधे तौर पर होगा. राज्य निर्वाचन आयोग ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है. अब इंतजार राज्य सरकार की हरी झंडी का है. उसके बाद नगरीय निकाय चुनाव की तारीखों का ऐलान होगा. जो तय करेगा जीत का सरताज कौन होगा.