सारनी। संस्कार भारती मध्यभारत प्रान्त के “मध्य भारत कला दर्शन” के अंतर्गत “कला साधक और कला साधना” ऑन लाइन प्रस्तुतिपरक श्रृंखला के अंतर्गत , मध्यभारत प्रान्त का प्राकृतिक छटा के मनमोहक दृश्यों से समृद्ध, लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर , विभिन्न आदिवासी संस्कृति और परम्पराओं के पोषक सतपुड़ा के घने जंगल और पर्वत श्रृंखलाओं में बसे सारनी  के कलाकार  पुरुषोत्तम वर्मा द्वारा लोकरंजन भक्ति गीत संगीत,  मोतीराम जवने द्वारा पुरातन लोक तालवाद्य खंजरी का अद्वितीय वादन और  पवन मेहरा द्वारा शिवशक्ति का मन मोहक नृत्य की  सुंदर  प्रस्तुति  कर दर्शको का मन मोह लिया।  यह कार्यक्रम मठारदेव मंदिर के परिसर में आयोजित किया गया।
सर्वप्रथम लोक गायक पुरुषोत्तम वर्मा ने लोकरंजक संगीत में गुरु की महिमा का वर्णन करते हुए “सद्गुरु का दरबार अनूठा, दैहिक दैविक भौतिक तीनों ताप मिटाए जाते हैं, गुरु चरणों में आकर देखो सब कलह कलेश मिट जाते हैं ।”  इसके साथ भारतीय संस्कृति और मानव जीवन की महानता का वर्णन करते हुए गीत प्रस्तुत किया। मोतीराम जवने  द्वारा पुरातन लोक तालवाद्य खंजरी का अद्वितीय वादन करते हुए मातृभूमि भारतवर्ष की महिमा का वर्णन करते हुए राष्ट्र समृद्धि और उन्नति की कामना का गीत प्रस्तुत किया।
अंत में लोक नर्तक पवन मेहरा ने अर्द्धनारीश्वर  शिवशक्ति की आराधना प्रस्तुत की
तबले पर ठाकुर विश्वकर्मा, ढोलक पर -राजा वाईकर, हारमोनियम पर पुरूषोतम वर्मा गायक पुष्पेद , योगेन्द्र कुमार  ने सहयोग किया। कार्यक्रम का संचालन संस्कार भारती की सारणी इकाई के संतोष प्रजापति ने किया। इस मौके पर संस्कार भारती सारनी के अध्यक्ष अंबादास सूने , प्रवीण सोनी , पुष्पलता बारंगे उपस्थित थे।

By Vishal

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