सारनी। वर्तमान में चल रही कोविड-19 जैसी विषम परिस्थिति में भी श्रम कानूनों में बदलाव, विद्युत संसोधन अधिनियम 2020 तथा केंद्र शासित राज्यो में वितरण कंपनियों के निजीकरण के विरोध में विद्युत मंडल कर्मचारी यूनियन द्वारा प्रान्त में अनेक स्थानो से  ज्ञापन प्रधानमंत्री के नाम दिये गये हैं। प्रदेश महामंत्री  सुशील शर्मा एवं क्षेत्रीय महामंत्री अंबादास सुने ने बताया कि भारत के प्रधानमंत्री महोदय को संबोधित किये गये ज्ञापन में विद्युत संशोधन  अधिनियम 2020 को वापस लेने तथा केंद्र शासित प्रदेशो में वितरण कंपनियों के निजीकरण को समाप्त करने तथा श्रम कानूनो में बदलाव को वापस लेने  का निवेदन किया गया है।   क्षेत्रीय महामंत्री अंबादास सूने  एवं सचिव जय साहू ने बताया कि  राज्य के विद्युत मंडलों ने ग्रामीण  विद्युतीकरण का कार्य  किया  जिसके कारण गांव – गांव तक  बिजली पहुंच सकी है। किसान आत्म निर्भर हुआ है। मध्यप्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों से लगातार कृषि कर्मण अवार्ड लिया है। निजीकरण से किसानों को बिजली महंगी मिलेगी। राजनैतिक दलों द्वारा अपने लाभ के लिए विद्युत मंडल, कंपनियों का शोषण किया जाता रहा है । 1984 में मध्यप्रदेश मे कांग्रेस सरकार ने सिंगल पाइंट कनेक्शन की योजना बनाई, जिसके कारण  मध्यप्रदेश विद्युत मंडल को लाखो का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। सभी उद्योगों की नींव है, बिजली उद्योग, बिजली उद्योग के निजीकरण का विरोध आज देश हो रहा है। विद्युत मंडल कर्मचारी यूनियन शाखा सारनी के सचिव जय साहू ने बताया कि यूनियन यूनाइटेड फोरम का घटक है। इस मौके पर जितेन्द्र वर्मा, दिनेश मेवाडा, बलराम बचले, धर्मेश मालवीय, सतीश कुमार, सोनू पठारिया ओर अनेक कर्मचारी  उपस्थित थे।

By Vishal

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