सागर। सागर जिले के बंडा और शाहगढ़ क्षेत्र में नकली और जहरीली शराब से मौतों का सिलसिला लगातार जारी है। जमीनी जानकारी के मुताबिक अब तक करीब 28 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि प्रशासन ने 15 मौतों की पुष्टि की है। 46 मरीज बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में भर्ती हैं। इनमें 5 की हालत गंभीर है और उनका आईसीयू में इलाज चल रहा है। बुधवार को नया मरीज सामने नहीं आया और किसी मौत की सूचना भी नहीं मिली। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को घटनाक्रम की समीक्षा की और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए अफसरों को फ्री हैंड दिया। इसके बाद पुलिस और प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। आरोपियों की तलाश में मध्यप्रदेश के अलग-अलग जिलों के साथ उत्तर प्रदेश में भी पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं। फरार आरोपियों पर इनाम घोषित किया गया है।
पुलिस अब तक करणी सेना का संभागीय अध्यक्ष चंद्रभान सिंह राजपूत समेत 16 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। उनसे पूछताछ की जा रही है। पुलिस और प्रशासन की टीमें आरोपियों के अवैध कब्जों और ठिकानों को चिह्नित कर रही हैं। इनकी जांच के बाद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की तैयारी है। पुलिस ने कई ठिकानों से अवैध शराब भी जब्त की है।
46 मरीज भर्ती, 5 गंभीर; 60 से ज्यादा स्वस्थ होकर घर लौटे
शराब कांड से प्रभावित 46 मरीज अभी बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में भर्ती हैं। इनमें 5 मरीजों की स्थिति गंभीर है और उन्हें आईसीयू में रखा गया है। वहीं 60 से ज्यादा मरीजों की हालत में सुधार होने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है।
बुधवार को कोई नया मरीज सामने नहीं आया। किसी नई मौत की सूचना भी नहीं मिली। प्रशासन ने प्रभावित गांवों में निगरानी बढ़ा दी है। पुलिस की गश्त के साथ लोगों को शराब से दूर रहने के लिए मुनादी भी कराई जा रही है।
नए आईजी इरशाद वली को सागर की कमान
सागर के आईजी मिथलेश शुक्ला 31 अगस्त को सेवानिवृत्त हो गए थे। इसके बाद आईजी का पद खाली था। बुधवार रात गृह विभाग ने इरशाद वली को सागर संभाग के आईजी की जिम्मेदारी सौंपी। वहीं, 5 सितंबर को संभाग आयुक्त अनिल सुचारी का तबादला किया गया था। उनकी जगह दिलीप कुमार ने सागर संभाग आयुक्त का पद संभाल लिया है। शराब कांड के बीच पुलिस और प्रशासन के शीर्ष स्तर पर हुए इन बदलावों को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
शराब कांड की न्यायिक जांच के आदेश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बंडा में हुए शराब कांड की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। जांच में शराब की बिक्री, सप्लाई, मौतों के कारण, प्रशासनिक स्तर पर हुई चूक और पूरे घटनाक्रम से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच की जाएगी।
कांग्रेस बोली- मुख्यमंत्री मृतक परिवारों से नहीं मिले
जिला कांग्रेस कमेटी सागर ग्रामीण के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह मोहासा ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सागर दौरे को महज औपचारिकता बताया। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी जनहानि के बावजूद मुख्यमंत्री बंडा जाकर मृतकों के परिवारों से नहीं मिले। मोहासा ने आरोप लगाया कि सरकार मौतों का वास्तविक आंकड़ा छिपा रही है और प्रशासन के आंकड़ों तथा जमीनी स्थिति में अंतर है। उन्होंने मृतकों के विसरा की जांच भोपाल की स्वतंत्र फॉरेंसिक लैब से कराने की मांग की। कांग्रेस ने मृतकों के परिजन को 50-50 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की मांग भी की है। कांग्रेस ने यह भी कहा कि विसरा जांच पूरी तरह निष्पक्ष होनी चाहिए, ताकि मौतों के वास्तविक कारण सामने आ सकें।
ऐसे सामने आया शराब कांड
- 5 सितंबर, शनिवार: शाम से बंडा सिविल अस्पताल में अचानक बड़ी संख्या में मरीज पहुंचने लगे। कई मरीजों की हालत इलाज के दौरान बिगड़ने लगी। उन्हें शरीर में अकड़न, उल्टी, शरीर नीला पड़ने और आंखों की रोशनी कम होने जैसी शिकायतें थीं। स्थिति असामान्य लगने पर वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी गई।
- कलेक्टर प्रतिभा पाल और एसपी अनुराग सुजानिया स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ बंडा पहुंचे। मरीजों को जिला अस्पताल और बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। इसी दौरान कुछ मरीजों की मौत हो गई। मरीजों और उनके परिजनों से पूछताछ में शराब पीने की जानकारी सामने आई, जिसके बाद अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई।
- 6 सितंबर, रविवार: सुबह तक 9 मरीजों की मौत की सूचना थी। शाम तक मौतों का आंकड़ा 15 से ज्यादा हो गया। पुलिस ने क्षेत्र में अवैध शराब के ठिकानों पर दबिश देना शुरू किया। आरोपियों की धरपकड़ की गई और अवैध शराब जब्त की गई। कार्रवाई के बाद नए मरीजों के अस्पताल पहुंचने की संख्या में कमी आने लगी।
- 7 सितंबर, सोमवार: मौतों का आंकड़ा 22 के पार पहुंच गया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया। अलग-अलग स्थानों से अवैध और संदिग्ध शराब जब्त की गई।
- 8 सितंबर, मंगलवार: स्थिति में सुधार के संकेत मिले। दो और मौतें हुईं। दूसरी ओर पुलिस और प्रशासन ने प्रभावित गांवों में निगरानी बढ़ा दी। गांव-गांव पुलिस गश्त की गई और मुनादी कराकर लोगों से शराब नहीं पीने की अपील की गई।
- 9 सितंबर, बुधवार: कोई नया मरीज सामने नहीं आया और किसी नई मौत की सूचना भी नहीं मिली। पुलिस ने कार्रवाई जारी रखते हुए गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 16 तक पहुंचाई। उनके कब्जे और ठिकानों से अवैध शराब जब्त की गई। फरार आरोपियों की तलाश में मध्यप्रदेश के साथ उत्तर प्रदेश में भी दबिश दी जा रही है।
इन लोगों के खिलाफ केस दर्ज
पुलिस के मुताबिक मामले में जुझार लोधी, दिनेश सिंह, सौरभ लोधी, गोविंद लोधी, मनोहर लोधी, लाइसेंसी यशवंत ठाकुर, मनीष लोधी, आशीष साहू, आकाश राय, रहीम खान, सत्यम, आशाराम, अरविंद, रोहित, माखन, अनिकेत गंधर्व, विशाल लोधी, मंगल रजक और राजा सिंह समेत अन्य के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं।
वहीं विनायका थाने में राम सिंह लोधी निवासी पाटन, ततरवारा सरपंच चंदू उर्फ चंद्रभान पिता द्वारिका प्रसाद राजपूत निवासी ततरवारा, अरविंद पिता आशाराम यादव, भगवान सिंह पिता देवी सिंह लोधी, मानसिंह प्रताप बिहार अहिरवार, लाइसेंसी ठेकेदार सिद्धार्थ कुशवाहा, रोहित पिता उत्तम शिवहरे निवासी छतरपुर, राघवेंद्र पिता सोहन सिंह निवासी ततरवारा, धर्मेंद्र पिता भुजबल राजपूत निवासी ततरवारा और सोहन पिता उमराव सिंह राजपूत निवासी ततरवारा के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है।
पुलिस का कहना है कि मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और जांच के आधार पर शराब की सप्लाई, बिक्री और पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका सामने लाई जा रही है।