- मंत्री शाह ने कर्नल सोफिया पर की थी टिप्पणी
- SG बोले- उनका इरादा तारीफ करने का था
दिल्ली/भोपाल। मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी को ‘आतंकवादियों की बहन’ कहकर टिप्पणी की थी। उनके खिलाफ FIR दर्ज करने को चुनौती दी गई है।
मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस जे.वी. मोहन की बेंच कर रही है। इससे पहले सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मंत्री के प्रति नरम रुख अपनाने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि शाह का इरादा कर्नल कुरैशी की तारीफ करने का था, लेकिन वे अपनी बात सही तरीके से नहीं रख सके।
सुप्रीम कोर्ट पिछली सुनवाइयों में मामले पर कड़ा रुख अपना चुका है। सरकार को निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। मध्य प्रदेश कैबिनेट ने मंत्री के खिलाफ केस चलाने की मंजूरी न देने का प्रस्ताव राज्यपाल के पास भेजा था। ऐसे में आज की सुनवाई अहम मानी जा रही है।
मंत्री ने कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए थे विवादित बयान
मंत्री कुंवर विजय शाह के बयान के बाद मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने खुद संज्ञान लिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। SIT ने BNS की धाराओं के तहत केस चलाने की अनुमति सरकार से मांगी थी।
मंत्रिपरिषद ने अभियोजन की मंजूरी न देने का प्रस्ताव राज्यपाल के पास भेजा
मंगलवार (25 अगस्त) को हुई मध्य प्रदेश कैबिनेट की बैठक में मंत्री के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी न देने वाला प्रस्ताव लाया गया था। कैबिनेट बैठक कक्ष से पांच सीनियर ऑफिसर्स को छोड़कर बाकी सभी को बाहर भेज दिया गया।
इसके बाद पूरी कैबिनेट ने विजय शाह के खिलाफ अभियोजन यानी मुकदमा चलाने की मंजूरी न देने का प्रस्ताव राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेज दिया। हालांकि, अभी तक राज्यपाल की ओर से इस मामले में कोई निर्णय लिया गया है या नहीं, यह सुप्रीम कोर्ट में सरकार के वकीलों की दलीलों और रिपोर्ट से स्पष्ट होगा।
कैबिनेट की बैठक में मंत्रियों का मुख्य तर्क था कि विजय शाह इस मामले में सार्वजनिक मंचों और लिखित रूप में करीब तीन से चार बार माफी मांग चुके हैं। इसलिए अब उनके खिलाफ मुकदमा चलाने का कोई कानूनी और व्यावहारिक औचित्य नहीं बनता। कैबिनेट की यह सिफारिश अंतिम निर्णय के लिए राज्यपाल मंगू भाई पटेल के पास भेजी गई है।
‘अब बहुत हो चुका’ कहकर SC ने सरकार को चेताया था
अभियोजन की मंजूरी देने में हो रही देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले ही मध्य प्रदेश सरकार को कई बार फटकार लगा चुका है। पिछली सुनवाइयों के दौरान कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा था- अब बहुत हो चुका (Enough is enough), हमारे आदेश का पालन कीजिए।
अदालत ने सरकार को निर्णय लेने के लिए अंतिम रूप से चार सप्ताह का समय दिया था। जब मंत्री के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि वे कई बार माफी मांग चुके हैं, तो सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि माफी मांगने में बहुत देर हो चुकी है।
कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि यह माफी दिल से नहीं आई, बल्कि कानूनी कार्रवाई और कोर्ट के संज्ञान से बचने का एक बहाना है। अदालत ने नेताओं को सार्वजनिक मंचों पर गरिमा बनाए रखने की नसीहत भी दी थी।
मंत्री शाह ने महू में दिया था बयान
जनजातीय कार्य विभाग के मंत्री विजय शाह ने 11 मई 2025 को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में हलमा कार्यक्रम के दौरान भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी।
ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में उन्होंने कहा था: उन्होंने (आतंकियों ने) कपड़े उतार-उतार कर हमारे हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी की तैसी करने उनके घर भेजा।
इसके बाद शाह ने कहा था : अब मोदी जी कपड़े तो उतार नहीं सकते। इसलिए उनकी समाज की बहन को भेजा कि तुमने हमारी बहनों को विधवा किया है, तो तुम्हारे समाज की बहन आकर तुम्हें नंगा करके छोड़ेगी। देश का मान-सम्मान और हमारी बहनों के सुहाग का बदला तुम्हारी जाति, समाज की बहनों को पाकिस्तान भेजकर ले सकते हैं।