• समान नागरिक संहिता पर मंथनहितधारकों और आमजन से लिए गए सुझाव

बैतूल। मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता के अध्ययन एवं परीक्षण के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति के सदस्य समाजिक कार्यकर्ता श्री बुधपाल सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में महत्वपूर्ण जन परामर्श बैठक आयोजित की गई। बैठक में उच्च स्तरीय समिति के सदस्य श्री बुधपाल सिंह ने संहिता के प्रावधानों के विषय में विस्तार से जानकारी दी और विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों से सुझाव एवं विचार प्राप्त किए।

बैठक में केंद्रीय राज्यमंत्री श्री दुर्गादास उईके,  विधायक आमला डॉ योगेश पंडाग्रे, अनुसूचित जनजातीय आयोग के सदस्य श्री मंगल सिंह धुर्वे, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती पार्वतीबाई बारस्कर, नगर पालिका अध्यक्ष सारणी श्री किशोर बरदे, जनपद सदस्य श्री शैलेश कुंभारे, कलेक्टर डॉ सौरभ संजय सोनवणे, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री कमलेश खरपूसे सहित गणमान्य नागरिक, राजनैतिक दल,बार काउंसिल, महिला एवं बाल अधिकार संरक्षण से जुड़े गणमान्य व्यक्ति, शांति समिति के सदस्य, सामाजिक संगठन तथा सभी समुदाय के प्रतिनिधि एवं अन्य जन प्रतिनिधिगण उपस्थित रहें।

बैठक को संबोधित करते हुए समिति सदस्य श्री बुधपाल सिंह ने कहा कि समान नागरिक संहिता का प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद-44 में किया गया है, जिसका उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समानता, न्याय और कल्याण सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि गोवा में आजादी के पहले से ही समान नागरिक संहिता लागू है और गोवा के 1961 में भारत में विलय के बाद भी यह व्यवस्था जारी रखी गई। वर्तमान में उत्तराखंड, गुजरात और असम जैसे राज्यों में भी यूसीसी लागू है तथा मध्यप्रदेश इसे लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित व्यवस्था में जनजातीय समुदाय की परंपराओं को देखते हुए, अनुसूचित जनजातियों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। श्री बुधपाल सिंह ने कहा कि वर्तमान में विवाह, विवाह विच्छेद, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण एवं लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषय विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों के अंतर्गत आते हैं। यूसीसी का उद्देश्य इन विषयों पर सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था स्थापित करना है, जिससे महिला और पुरुष दोनों को समान अधिकार प्राप्त हो सकें। उन्होंने कहा कि लोगों को यह भ्रम नहीं पालना चाहिए कि यूसीसी लागू होने से उनकी धार्मिक स्वतंत्रता प्रभावित होगी। यह कानून किसी भी धर्म की पूजा-पद्धति या धार्मिक गतिविधियों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाता है। इसका मुख्य उद्देश्य सभी जाति और धर्म के लोगों को समान अधिकार उपलब्ध कराना है।

केंद्रीय राज्यमंत्री श्री उईके ने सभी धर्म, संप्रदाय और नागरिकों को यूसीसी लागू करने के सम्बन्ध खुलकर अपने परामर्श देने का आग्रह किया। विधायक डॉ योगेश पंडाग्रे ने कहा कि महिला शिक्षित होगी तभी वे आगे की पीढ़ी को शिक्षित और समृद्ध बन सकती है। इसलिए किसी भी समाज और देश के विकास के लिए महिलाओं के सशक्तिकरण अत्यावश्यक है। बैठक में उपस्थित नागरिकों एवं विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने विवाह एवं विवाह विच्छेद के लिए , महिलाओं के विभिन्न अधिकारों पर सुझाव दिए गए। अनुच्छेद-44 एवं यूसीसी के संबंध में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के सुझाव भी दिए गए।

         समिति सदस्य श्री बुधपाल सिंह ने बताया कि जो लोग बैठक में अपने सुझाव प्रस्तुत नहीं कर सके हैं, वे ucc.mp.gov.in पोर्टल के माध्यम से अपने सुझाव दर्ज करा सकते हैं। प्राप्त सुझावों के आधार पर यूसीसी का प्रारूप तैयार किया जाएगा, जिसे विधि विभाग की सहमति के बाद विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों के विचारों को समाहित करते हुए आगे की प्रक्रिया संचालित की जाएगी।

By Vishal

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