- केंद्रीय राज्य मंत्री डीडी उइके ने किया शुभारंभ
- महिलाओं के स्वामित्व वाले होमस्टे से बदल रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पलायन की तस्वीर
बैतूल। मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड की ‘जनजातीय पर्यटन’ ट्राइबल टूरिज्म परियोजना के तहत रविवार को बैतूल जिले के बज्जरवाड़ा गांव में 3 नए ग्रामीण होमस्टे का भव्य उद्घाटन किया गया। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को ‘बैक टू विलेज’ संस्था द्वारा बैतूल और छिंदवाड़ा जिलों के कुल 5 गांवों में जमीन पर उतारा जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य छोटे भूखंड वाले और आर्थिक रूप से कमजोर जनजातीय परिवारों के लिए आय का एक वैकल्पिक स्रोत तैयार करना है।
इन होमस्टे का उद्घाटन मुख्य अतिथि केंद्रीय जनजातीय मामलों के राज्य मंत्री भारत सरकार दुर्गादास उइके द्वारा किया गया। इस अवसर पर उपाध्यक्ष, मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद व राज्य मंत्री दर्जा मोहन नागर, सदस्य अनुसूचित जनजाति आयोग, म.प्र. – राज्य मंत्री दर्जा मंगलसिंह धुर्वे, विधायक घोड़ाडोंगरी श्रीमती गंगा उइके और संस्थापक बैक टू विलेज मनीष कुमार विशेष रूप से उपस्थित रहे।
केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार जनजातीय समाज के कल्याण के लिए अत्यंत संवेदनशील है और लगातार जनजातीय अनुकूल योजनाएं ला रही है। ग्रामीण जीवन शुद्ध और प्रदूषण मुक्त है, यही वजह है कि आज पूरी दुनिया ग्रामीण संस्कृति की ओर आकर्षित हो रही है। हमारी जनजातीय परंपराओं और संस्कृति के पीछे एक गहरा विज्ञान छिपा है, और ये होमस्टे इस संदेश को वैश्विक स्तर पर फैलाने का काम कर रहे हैं।
उपाध्यक्ष मोहन नागर ने परियोजना के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बैक 2 विलेज के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में प्रकृति के करीब रहने वाली जनजातीय जीवनशैली पूरे विश्व के लिए मार्गदर्शक है। उन्होंने अन्य ग्रामीणों को भी इस मुहिम से जुड़कर होमस्टे बनाने के लिए आमंत्रित किया।
विधायक श्रीमती गंगा उइके ने होमस्टे संचालकों को पर्यटकों के अनुभव को और बेहतर बनाने के लिए नए नवाचार (इन्नोवेशन) करने का सुझाव दिया, जैसे होमस्टे परिसर में धीमी आवाज में पारंपरिक जनजातीय संगीत बजाना। आयोग सदस्य श्री मंगलसिंह धुर्वे ने जनजातीय संस्कृति और पारंपरिक खान-पान के महत्व पर जोर देते हुए सभी होमस्टे स्वामियों को उनके इस नए सफर के लिए शुभकामनाएं दीं।
महिलाओं को मिला मालिकाना हक
बैक टू विलेज’ के संस्थापक मनीष कुमार ने बताया कि संस्था की योजना गांव के हर परिवार से कम से कम एक व्यक्ति को इस पर्यटन परियोजना से जोड़ने की है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे शहरों की चकाचौंध से प्रभावित न हों, क्योंकि बाहरी लोग ग्रामीण जीवनशैली, पारंपरिक भोजन और संस्कृति से आकर्षित होकर ही यहां आ रहे हैं। इसलिए अपनी परंपराओं को सहेज कर रखना बेहद जरूरी है।
म.प्र. पर्यटन बोर्ड के दिशा निर्देशों के अनुसार इन सभी होमस्टे का मालिकाना हक परिवार की महिला सदस्य के पास रहेगा। इस फैसले ने ग्रामीण महिलाओं के सशक्तीकरण में अभूतपूर्व भूमिका निभाई है। महिलाएं अब अपने घरेलू कामकाज और परिवार की जिम्मेदारियों को प्रभावित किए बिना सम्मानजनक कमाई कर रही हैं। इस परियोजना का एक बड़ा सकारात्मक असर यह हुआ है कि शहरों की ओर पलायन कर चुके पुरुष अब वापस अपने गांव लौट रहे हैं। वे अपनी पत्नियों के साथ होमस्टे के संचालन में हाथ बंटा रहे हैं और बाहर की तुलना में अपने घर पर ही रहकर अधिक आय अर्जित कर रहे हैं।
कार्यक्रम के समापन पर प्रयास ग्राम पर्यटन समिति के अध्यक्ष पवन परते ने सभी अतिथियों और ग्रामीणों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने साझा किया कि इस पूरे उद्घाटन समारोह के दौरान कहीं भी प्लास्टिक का उपयोग नहीं किया गया। यह कदम पर्यावरण के प्रति उनकी गहरी चिंता और ‘उत्तरदायी पर्यटन’ के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो कि इस पूरी परियोजना की मुख्य आत्मा है। कार्यक्रम का मंच संचालन मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के घोड़ाड़ोंगरी प्रखंड के समन्वयक संतोष सिंह राजपूत ने किया।