


रानीपुर। आज पुराने रानीपुर थाना भवन का माननीय सांसद डीडी उइके,संसदीय क्षेत्र हरदा बैतूल, कलेक्टर अमनबीर सिंह बैंस, पुलिस अधीक्षक सिमाला प्रसाद और शहीदों एवं स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों की उपस्थिति में शुभारंभ किया गया ! जिसमें शहीदों की स्मृतियां सहेजी जाएंगी और उन्हें संरक्षित किया जाएगा। रानीपुर क्षेत्र स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की कर्मभूमि रही है, इसलिए इसका महत्व ज्यादा है। रानीपुर थाना का पुराना इतिहास है। जब थाने की नई बिल्डिंग बन गई तो इस नए भवन को लेकर सुझाव दिए गए थे कि इसके इतिहास को सजोकर रखना चाहिए। यहां के लोगों ने स्वतंत्रता संग्राम में बढ़चढक़र हिस्सा लिया था। इसी को लेकर थाना भवन को बनाया गया और इस भवन में स्वतंत्रता संग्राम के समय जो हथियार उपयोग किए गए थे वह भी रखे गए हैं। इसके अलावा वर्दी भी रखी गई हैं। पहले कैसी वर्दी पहनी जाती थी? इसकी जानकारी भी लोगों को मिले। पुलिस का 100 साल का रिकार्ड भी जो उपलब्ध हुआ उसे संरक्षित करके रखा गया है। इसमें एक लायब्रेरी भी बनाई गई है जिसमें पुलिस से संबंधित दस्तावेज हैं और कुछ दस्तावेज अंग्रेजों के समय के भी हैं। यह थाना इसलिए महत्वपूर्ण स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यहां महत्वपूर्ण घटनाएं घटित हुई थी। एसपी सिमाला प्रसाद का प्रयास सराहनीय है। जिन्होंने इतिहास को पुर्नजीवित करने का प्रयास किया है। रानीपुर थाना स्वतंत्रता संग्राम के दौरान घटी विभिन्न घटनाओं से जुड़ा है इसलिए इसका विशेष महत्व है और अब आने वाली पीढिय़ों को जिले के इतिहास की बहुत सारी जानकारी मिल सकेंगी।
रानीपुर थाने पर किया था हमला
ग्राम महेंद्रवाड़ी के निवासी और सुभाषचंद्र बोस द्वारा गठित फारवर्ड ब्लाक के सदस्य रहे स्वतंत्रता संग्राम के विभिन्न आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सरदार विष्णु सिंह गोंड ने भारत छोड़ो आंदोलन में 22 अगस्त 1942 को गांधीवादियों के साथ मिलकर थाना रानीपुर भवन पर कुल्हाड़ी से प्रहार किया था। इसके साथ ही थाने में आग लगा दी थी। प्रहार के निशान आज भी मौजूद हैं। इस आंदोलन के पश्चात सरदार विष्णु सिंह को आजीवन कारावास की सजा हुई थी। भवन में उनका चित्र लगाकर उनका परिचय भी दिया गया है। साथ ही कुल्हाड़ी भी रखी गई है।
डीजी से लेकर आरक्षक तक वर्दी पहने स्टेच्यू रखे गए हैं। इसके अलावा पुलिस विभाग में बजाए जाने वाले वाद्य यंत्र, उपयोग किए जाने वाले हथियार, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के चित्र और उनका परिचय सहित हथियार, बर्तन, टेलीफोन, टाईपराईटर, लालटेन, महात्मा गांधी के बैतूल आगमन से संबंधित चित्र, अंग्रेजों के समय की एफआईआर, पुलिस के महत्वपूर्ण दस्तावेज सहित स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े तथ्य और पुलिस विभाग से जुड़े तथ्य रखे गए हैं। साथ ही पुलिस विभाग में शहीद हुए पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों का परिचय सहित चित्र भी रखे गये है।
लाल थाने के नाम से प्रसिद्ध था रानीपुर थाना
1895 में शाहपुर थाने की एक चौकी थी। थाने में प्रथम अपराध 1900 में धारा 380 का दर्ज हुआ था। 1900 में रानीपुर थाना पूर्णरूपेण अस्तित्व में आ चुका था। थाने का निर्माण ब्रिटिश शासनकाल के दौरान 1913 में हुआ था। थाने में उपलब्ध ग्राम अपराध पुस्तिका में उल्लेखित सर्वाधिक प्राचीन टीप 1913 की है तथा मुलाहिजा रजिस्ट्रर 1911 से है। रानीपुर थाने का लाल रंग होने के कारण यह लाल थाने के नाम से प्रचलित था। यह थाना जंगल सत्याग्रह का भी साक्षी रहा है। सरदार विष्णु सिंह के नेतृत्व में 300 क्रांतिकारियों ने थाना रानीपुर पर हमला किया था। 2016 तक इसी भवन में थाना संचालित रहा। इस शुभ अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों को भी आमंत्रित किया गया था जिनका सांसद दुर्गादास उइके, कलेक्टर बैंस, एसपी सिमाला प्रसाद सहित अन्य अतिथियों ने शाल-श्रीफल से सम्मान किया। सम्मान पाकर परिजन भावुक हो गए। उपरोक्त कार्यक्रम में पूर्व संसदीय सचिव रामजीलाल उइके, मंडल अध्यक्ष राजेश मेहतो, एडीशनल एसपी नीरज सोनी, शाहपुर एसडीओपी महेंद्र सिंह मीणा, सारनी एसडीओपी रोशन जैन, बैतूल एसडीओपी सृष्टि भार्गव, भंैसदेही एसडीओपी शिवचरण बोहित, डीएसपी अजय गुप्ता, सारनी टीआई रत्नाकर हिंगवे, रानीपुर टीआई नन्हें वीर सिंह, आरआई मनोरमा बघेल, सूबेदार संदीप सुनेश सहित अन्य मौजूद थे।