बैतूल। चाइनीज झालर का नाम से पुकारी जाने वाली जलकुंभी ने बैतूल में जलस्रोतों को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। इसके फैलाव से बैतूल में जल आपूर्ति करने वाली प्रमुख माचना नदी प्रदूषित हो गई है। नदी का 10 किमी का इलाका चाइनीज झालर से ढंक गया है। इससे कई नुकसान हो रहे हैं।
पानी पर तैरने वाला अमेजन मूल का यह पौधा जलीय जंतुओं के लिए जानलेवा बन गया है। बैतूल की जीवनदायिनी मानी जाने वाली माचना नदी पर अब इस पौधे का कब्जा हो गया है। नदी के सांपना कैचमेंट और एनीकेट इलाके से लेकर 10 किमी के क्षेत्र में यह झालर नदी को लील गयी है। नदी का पूरा जलक्षेत्र झालर से ढंक चुका है, जिससे नदी के जलीय जंतु जिनमें मछलियां, केकड़े व झींगे शामिल हैं, बेमौत मारे गए हैं।
मछुआरों के मुताबिक झालर से न तो नदी में मछलियां बची हैं और न ही नदी इस लायक बची है कि उसमें उतरकर मछली पकड़ सकें। पौधे के पानी से ऑक्सीजन खींच लेने की वजह से पानी खराब हो चुका है। सीएमओ अक्षत बुन्देला ने बताया कि वे मछुआ समुदाय के सहयोग से इसकी सफाई का अभियान चलवाएंगे।
यह है जल कुंभी
जल कुंभी सबसे पहले भारत में बंगाल में अपने खुबसूरत फूलोंं और पत्तियों के आकार के कारण लाया गया था। इसे बंगाल का आतंक भी कहा जाता है। यह रुके हुए जल में बढ़ता है जो जल से ऑक्सीजन खींच लेता है, जिससे मछलियां मर जाती हैं। यह एक बहुत तेजी से फैलने वाला खरपतवार है। यह अनेक जलीय प्रजातियों को अपनी उपस्थिति के कारण नष्ट कर देता है। इसमें कायिक प्रवर्धन तेजी से होता है जो अल्प समय मैं ही सम्पूर्ण जलाश्य में फैल जाता है और उसे ढंक देता है।