बैतूल। बैतूल-इंदौर नेशनल हाइवे 59 ए के लिए जमीन का अधिग्रहण अफसरों और किसानों के बीच विवादों का कारण बन गया। बुधवार जमीन पर कब्जा लेने पहुंचे अफसरो को यहां समझाइश के बावजूद किसानों ने जमीन देने से इंकार कर दिया। यहां तक कि वे जेसीबी के सामने लेट गए।
मुआवजा दर कम होने से आक्रोश
हाइवे के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। सैकड़ों किसानों को मुआवजे की रकम मिल भी चुकी है। लेकिन भडुस के 58 किसानों की 36 एकड़ जमीन का मामला सुलझ नहीं सका। किसान चन्द्र किशोर गहलोत के मुताबिक जमीन अधिग्रहण में गणना पत्रक का पालन नहीं किया जा रहा। हमारा क्षेत्र प्लानिंग क्षेत्र है। ये कृषि भूमि की दर का आंकलन कर पुरानी दर का मुआवजा दे रहे हैं। जिसकी गणना 9 लाख रु प्रति एकड़ की जा रही है। वास्तविक कीमत 25 से 30 लाख है। किसानों का आरोप है कि अधिकारियों ने कार्यालय में बैठकर किसानों का मुआवजा तय कर दिया और उनकी कीमती जमीन को कौड़ियों के दाम थमाकर अधिकृत करने की कोशिश की जा रही है । जो किसानों के साथ सीधे सीधे अन्याय है ।
प्रशासन पहुंचा तो भड़के किसान
जिन किसानों का अधिग्रहण नहीं किया गया। उन किसानों के घरों में मुआवजा प्राप्त करने के नोटिस भिजवा दिए गए। जमीन किसी दूसरे किसान की और मुआवजा बना दिया किसी और किसान का। कई किसान ऐसे भी हैं, जिनकी 1 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई। लेकिन 2 एकड़ जमीन पर अब कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। इसी बात को लेकर बुधवार को किसानों और अधिकारियों के बीच तब टकराव बढ़ गया। जब पुलिस प्रशासन के अधिकारियों की फौज जेसीबी, पोकलेन लेकर जबरन कब्जा करने भडूस गांव पहुंची। तो मौके पर आक्रोशित किसानों ने साफ कर दिया कि जब तक उन्हें गाइडलाइन के तहत मुआवजा नहीं दिया जाएगा, तब तक वे अपनी एक इंच जमीन भी नही देंगे। चाहे अपनी जान तक देनी पड़ जाए।