
चिचोली। हौसला हो तो पथरीली जमीन पर भी उम्मीदों की मनचाही हरियाली खिल सकती है । द़ढ़ इच्छा शक्ति मेहनत का जज्बा सूखती हुई विचारधारा के बीच उम्मीदों का कोमल अंकुरण की क्षमता रखता है और इससे हमारी समग्रता एक वृक्ष बना देती है इसी तरह का उदाहरण चिचोली तहसील मुख्यालय से 5 किलोमीटर की दूर जोगली गांव के किनारे पत्थर खदान पर देखा जा सकता है वैकल्पिक वृक्षारोपण के योजना के तहत किए गए प्रयास अब यहां वृक्ष बनकर हरियाली की छटा बिखेर रहे हैं यहां पौधे के अंकुरण के बाद वृक्ष बनने तक जिम्मेदारियों का ही प्रतिफल है कि 94% वृक्ष बन चुके हैं ग्राम जोगली के पत्थर खदान में 3 वर्ष पूर्व कोलार वाटर परियोजना के बदले वैकल्पिक वृक्षा रोपण के तहत वन विभाग के माध्यम से पौधरोपण कर पर्यावरण की सुरक्षा क्षेत्र को हरा-भरा रखने और ग्रामीणों को वन उपज का फायदा मिल सके इसी उद्देश्य को लेकर 25000 पौधे लगाने का लक्ष्य रखा । पथरीली जमीन पर जहां पूरे क्षेत्र में चट्टानी चट्टान नजर आते हैं ऐसी भूमि पर वन विभाग के वन परीक्षेत्र अधिकारी सुरेश सोनवंशी ने ग्रामीणों से चर्चा कर भूमि का चयन कर 25 हेक्टेयर भूमि पर 25000 पौधे जिसमें शिशु सागौन ,आंवला ,करंज, बेहडा , विलायती इमली, खमेर , अमतलाश , बांस फायकस , आंवला नीलगिरी, जामुन , सीताफल. सहित अन्य प्रजातियों के लक्ष्य से अधिक पौधे लगा दिए जो आज तक वट वृक्ष बन कर आने वाले समय के लिए ग्रामीणों को वन उपज के रूप में आंवला करंजी बहेड़ा प्राप्त हो सकेगा । इसकी निगरानी क्षेत्र के लोग भी करते हैं इसी का परिणाम है कि आज शत प्रतिशत पौधे पेड़ बन गए हैं सोमवार को ग्राम जोगली के उन्नत किसान शिवचरण वानखेडे शिवपाल ईगरे , लल्लन वानखेडे ,हौसीलाल गंगारे , कुंजीलाल ने नर्सरी का भ्रमण कर पथरीली चट्टान पर हरे भरे वृक्ष देखकर वन विभाग के मौजूद अधिकारी की प्रशंसा करते हुए कहा कि यहां पथरीली चट्टान पर मेहनत कर पौधे लगाकर आज वृक्ष के रूप में खड़े हैं पर्यावरण का तो सुधार करने में सहायक है हरियाली के साथ-साथ यह भूमि अतिक्रमण होने से बचाई जा सकी है।