बैतूल। बैतूल और मुलताई में मंगलवार को देशभक्ति और साम्प्रदायिक सौहार्द के दो नजारे देखने को मिले जब यहां ईद मिलादुन्नबी के जलसे में आईएएस बनने वाले युवक को सम्मानित किया गया तो वहीं जुलूस में तिरंगे ही तिरंगे लहराते नजर आए।
बैतूल को हमेशा से गंगा जमुनी तहजीब के लिए जाना जाता रहा है। शहर की प्रमुख जामा मस्जिद चौराहे पर आज ईद मिलादुन्नबी के जुलूस का समापन हुआ।यहां एक बड़ी सभा का आयोजन किया गया था। इसमे नगर के प्रमुख मुस्लिम धर्म गुरु और अंजुमन इस्लामिया कमेटी के पदाधिकारी शामिल थे।

आईएएस बने श्रेयांस सुराणा और उनके पिता को सम्मानित करते लोग।
इस सभा में उस समय सामाजिक सौहार्द नजर आया जब हाल ही में आईएएस की परीक्षा एक ही प्रयास में उतीर्ण करने वाले 269वीं रैंक पाए श्रेयांस सुराणा और उनके पिता विमल सुराणा का मंच पर बुलाकर सम्मान किया गया। इसे शहर के लिए गर्व का पल बताकर श्रेयांस की सफलता पर उन्हें बधाई दी गयी। इस मौके पर श्रेयांस ने कहा कि यह दिन आपसी भाईचारे, प्रेम और मोहब्बत का दिन है। सभी के बीच ऐसे ही भाईचारा बढ़ते रहे।
मुलताई में निकाले गए जुलूस में लहराते तिरंगे आकर्षण का केंद्र रहे। यहां नूरानी मस्जिद पारेगांव रोड से जुलूस निकलकर बस स्टैंड होते हुए नागपुर नाका, गांधी चौक, मासौद नाका होते हुए नूरानी मस्जिद पहुंचा। इस दौरान जुलूस में लहराते तिरंगे और वाहनों पर लगे ऐसे ही झंडों से देशभक्ति की झलक देखने को मिली। युवा पाशा खान ने बताया कि तिरंगे की मौजूदगी हमे वतन से मोहब्बत का जज्बा देती है। पैगम्बर साहब की भी सीख रही कि वतन से मोहब्बत ईमान का हिस्सा है। यही तिरंगा हमारी शान और पहचान है।