• ज्ञान की पाठशाला से मनुष्य जन्म मरण के बंधन से छूट जाता है

सारनी। चार दिवसीय सामवेद पारायण वैदिक यज्ञ में 800 वेद मंत्रों से आहुतियां डालकर समस्त जीव धारियों के लिए सुख समृद्धि की कामना की गई। शिवाजी ग्राउंड के समीप प्रेमलाल साहू के निवास में 8 मार्च से आयोजित चार दिवसीय वैदिक यज्ञ का गुरुवार समापन हुआ।आर्य समाज के तत्वाधान में चार दिवसीय सामवेद यज्ञ  का में सामवेद के 8 सौ वेद मंत्रो से आहुतियां देकर समस्त जीव धारियों के अंधकारमय जीवन मे ज्ञान का प्रकाश की कामना की गई। आर्य समाजियों ने बताया कि सामवेद परायण यज्ञ करने से मानव का बौद्धिक विकास के साथ पर्यावरण की शुद्धि होती है। वेद कथा प्रवचन, यजुर्वेद एवं सामवेद परायण महायज्ञ का आयोजन शिवाजी ग्राउंड ओल्ड एफ में प्रेमलाल के निवास में संपन्न हुआ। 
आठ सौ सामवेद मंत्रो के उच्चारण से यज्ञ में उपस्थित यज्ञ मानो से आहुति हवन कुंड में डलवाई गई। यज्ञ सुबह 5 से 8 और शाम 5 से 8 बजे तक आयोजित हुआ। सामवेद यज्ञ का समापन महाशिवरात्रि के दिन हुआ। ज्ञान कर्म और योग के अलग-अलग अधिकारी या पात्र हो सकते हैं किंतु भक्ति पर सबका अधिकार होता है। उसके लिए कोई विशिष्ट आवश्यक नहीं होती है इसलिए भक्ति सर्वश्रेष्ठ है। मनसा वाचा कर्मणा” में भाग्य दर्पण करने के पश्चात ही उसकी शक्ति प्राप्त होती है। सागर में गोते लगाने का सबसे बड़ा आनंद है कि इसके शरण में अनेक अवांतर ज्ञान  का श्रवण का आनंद मिलता है। यह बोधकथाएं हमें कल का साक्षात्कार या आत्म बोध कराने में बहुत सहायक होती हैं और दूसरे गंभीर तत्व विचार सरलता पूर्वक हृदय में होता है। मानव समाज में जागरुकता लाने  परोपकारी सभा अजमेर के तत्वाधान में वैदिक,सामवेद यज्ञ प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है।

By Vishal

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