मानदेय और 48 माह की बकाया राशि को लेकर आंगनवाड़ी कर्मियों ने किया प्रदर्शन, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

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बैतूल। केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2018 में घोषित बढ़े हुए मानदेय का भुगतान, 48 माह की लंबित राशि ब्याज सहित दिलाने तथा अन्य लंबित मांगों को लेकर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका एकता यूनियन (सीटू) के बैनर तले जिलेभर से पहुंचीं सैकड़ों आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने शुक्रवार 10 जुलाई को जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। कर्मचारी भवन परिसर में सभा आयोजित करने के बाद रैली निकालकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री, मुख्यमंत्री तथा प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री के नाम डिप्टी कलेक्टर मकसूद अहमद को ज्ञापन सौंपते हुए मांगों के शीघ्र निराकरण की मांग की।
कर्मचारी भवन परिसर में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए सीटू के जिलाध्यक्ष एवं यूनियन के संरक्षक कामरेड कुंदन राजपाल ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने सितंबर 2018 में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में 1500 रुपये तथा सहायिकाओं के मानदेय में 750 रुपये प्रतिमाह वृद्धि की घोषणा की थी, जिसे 1 अक्टूबर 2018 से लागू किया जाना था, लेकिन मध्यप्रदेश में लंबे समय तक इसका भुगतान नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि यूनियन द्वारा लगातार मांग उठाने के बावजूद समाधान नहीं हुआ, जिसके बाद मामला उच्च न्यायालय पहुंचा। उनके अनुसार न्यायालय ने राज्य सरकार को तीन माह के भीतर 6 प्रतिशत ब्याज सहित पूरी राशि का भुगतान करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद राज्य सरकार ने पुनर्विचार याचिका दायर की, जिसे 6 जुलाई 2026 को उच्च न्यायालय ने खारिज करते हुए केंद्र सरकार द्वारा बढ़ाई गई 48 माह की राशि एकमुश्त देने का निर्णय सुनाया। कामरेड राजपाल ने कहा कि आंगनवाड़ी कर्मियों को अपने अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है।
प्रदर्शन के बाद यूनियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी के नाम 19 सूत्रीय तथा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री के नाम 25 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से अनेक विभागों के कार्य कराए जाते हैं, लेकिन उन्हें न तो पर्याप्त सुविधाएं मिल रही हैं और न ही सम्मानजनक मानदेय, जिससे उनमें भारी नाराजगी है।
ज्ञापन में पोषण ट्रैकर एप के संचालन में नेटवर्क और निम्न गुणवत्ता वाले मोबाइल की समस्या का उल्लेख करते हुए सभी कार्यकर्ताओं को 5जी तकनीक वाला उच्च गुणवत्ता का मोबाइल तथा पर्याप्त डाटा उपलब्ध कराने की मांग की गई। इसके अलावा तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को स्कूल भेजने के बजाय आंगनवाड़ी में ही रखने, पर्यवेक्षक के पदों पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की शत-प्रतिशत पदोन्नति, सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष करने, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को न्यूनतम 41 हजार रुपये तथा सहायिकाओं को 32 हजार रुपये मासिक वेतन देने सहित अन्य मांगें भी प्रमुखता से उठाई गईं।
आंदोलन का नेतृत्व यूनियन की जिला अध्यक्ष सुनीता राजपाल, महासचिव पुष्पा वाईकर, उपाध्यक्ष योगिता शिवहरे, सचिव इंदिरा भारद्वाज, सुनीता तिवारी, गीता मालवी, उपाध्यक्ष आशा सूरजे, शबाना खान, जमना आठोले, संगीता डेहरिया, सुमित्रा पुवारे, ममता पवार, बबली, कुसुम बारस्कर और ललित कौशिक सहित अन्य पदाधिकारियों ने किया। प्रदर्शन में जिलेभर से बड़ी संख्या में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं शामिल रहीं।

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