जो तप करता है वह मुंह को जाता है- मुनि श्री उपाशात सागर महाराज

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चिचोली। मूर्ति में छिपे भगवान की भक्ति आत्मा में परमात्मा है इस शक्ति  की अभिव्यक्ति लिए तप  साधना जरूरी है एक शिल्प कलाकार एक चट्टान के टुकड़े को तराश  कर मूर्ति का आकार देता है पत्थर की चट्टान से मूर्ति की अभिव्यक्ति ही भारतीय संस्कृति है जिस तरह से स्वर्ण पाषण में छिपा होता है दूध में घी छुपा होता है तिल  के अंदर तेल व्याप्त रहता है उसी तरह से शरीर में आत्मा विद्यमान है आत्मा की अभिव्यक्ति ही परमात्मा की मूल उपलब्धि है । नगर में पर्यूषण महापर्व के दौरान जैन  संत निवास पर चल रहे पर्यूषण महोत्सव के दौरान जैन मुनि उपासंत सागर महाराज ने अपने उद्बोधन कहे मुनि श्री  ने आगे बताया कि जो तप करता है वह मोक्ष को जाता है जो दान करता है वह धनवान होता है लेकिन आज के युग में लोग पूर्व जन्म के इस संचित तप और पुण्य को मजाक समझते हैं सूर्य तप कर सारे संसार को प्रकाश देता है चंद्रमा तप कर औषधि में अमृत बरसाता है और पृथ्वी तप कर अनाज उत्पन्न कर प्राणी जगत का पालन करती है जो कठिन है उसे तप से प्राप्त किया जा सकता है पतित से पावन बनना है तो मनुष्य को तप शरण की भट्टी में अपने आप को तपाना  होगा ।  पर्यूषण पर्व के दौरान नगर पर्युषण महापर्व बहुत ही हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है  प्रातः श्री जी का अभिषेक पूजन आरती मुनि श्री के प्रवचन आरती एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

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