• मोहन नागर ने कहा- संकल्प से सब कुछ सम्भव

सारनी। चाइनीज झालर और जलीय खर पतवार से ढंक चुके सतपुड़ा डेम की सफाई के लिए अब सामाजिक कार्यकर्ता आगे रहे हैं। मंगलवार को जल प्रहरी मोहन नागर जी एवं बुधपाल सिंह ठाकुर की उपस्थिति में सामाजिक संगठनों, मछुआरा समितियों एवं आम नागरिकों की बैठक छठ घाट पर सम्पन्न हुई। बैठक में जन सहयोग एवं श्रमदान से डेम सफाई की योजना बनाई गई। सर्वसम्मति से यह तय किया गया कि सतपुड़ा जलाशय स्वच्छता अभियान आगामी 21 फरवरी से प्रारंभ होगा। इस अवसर पर उपस्थित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव दिए एवं प्रतीकात्मक श्रमदान कर डेम की सफाई का संकल्प लिया। मछुआरों ने महाजाल का घेरा बनाकर डेम की सफाई की बात कही

बैठक में  मछुआरा संघ,विद्या भारती, अभियंता संघ, मप्र विद्युत ठेका श्रमिक संघ,धर्मजागरण विभाग,विद्युत उत्पादन कर्मचारी संघ,पावर इंजीनियर एम्प्लाई एसोसिएशन,नगरपालिका मजदूर संघ, टेंट एशोसिएशन,कुनबी समाज संगठन, भोजपुरी एकता मंच,मेहरा डेहरिया समाज संगठन, भोजपुरी एकता मंच, कालीमाई व्यापारी संघ,बंगाली समाज सेवा समिति, पेट्रोल पम्पं एशोसिएशन, नगरपालिका पार्षद दल ,बगडोना मुस्लिम समाज के प्रतिनिधि सहित कई गण्यमान्य नागरिक और जनप्रतिनिधि मौजूद थे। सभी ने एक स्वर में कहा कि सतपुड़ा जलाशय सारनी की जीवन रेखा है। डेम की सुंदरता और इसके अस्तित्व को बचाना जरूरी है।

बैठक में बड़ी संख्या में उपस्थित नागरिकों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए जल प्रहरी मोहन नागर ने कहा कि सतपुड़ा डेम कभी सागर जैसा लहराता था आज इसकी दुर्दशा देखकर आंख में आंसू आ जाते हैं। आज यह डेम संकट में है। उन्होंने कहा कि जब भी कोई बड़ा संकट आता है तो समाज मिलकर मुकाबला करता है। 3 हजार एकड़ में फैले डेम की सफाई का काम उसी प्रकार कठिन है जैसे त्रेता युग में समुन्द्र पर सेतु बनाना। हमे गिलहरी समान योगदान देना है। संकल्प से सब कुछ सम्भव है। विद्या भारती के जनजातीय कार्य प्रमुख बुधपाल सिंह ठाकुर ने कहा कि पानी को लेकर किया जाने वाला कोई भी काम पूण्य का काम होता है। हम सभी के संगठित प्रयास से सतपुड़ा जलाशय फिर से स्वच्छ और दर्शनीय बनेगा।

पिछले ढाई साल से जलाशय की सफाई के संबंध में कार्य कर रहे पर्यावरणविद आदिल खान ने कहा कि खरपतवार की वजह से जलाशय प्रदूषित हो चुका है। उन्होंने बताया कि सलविनिया मॉलेस्टा की वजह से जलाशय के अंदर मौजूद जलीय पौधे मर गए व उन पर निर्भर मछलियां भी मर गई । मछलियों के सड़ने की वजह से जलाशय का पानी भी प्रदूषित हो गया है। प्रवासी पक्षी व अन्य जीवों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जलाशय की सफाई के लिए भी आदिल ने कई सुझाव दिए।

By Vishal

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