सारनी। जिन देशभक्तों के त्याग और बलिदान के फलस्वरूप हमें स्वाधीनता प्राप्त हुई है, कृतज्ञ भाव से उनकी पावन स्मृति को अपने हृदय में संजोए रखकर उनके प्रति सदैव सम्मान प्रकट करना चाहिए। यह विचार  नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के सहयोगी रहे  एवं आजाद हिंद फौज के सिपाही  सब आफीसर राधाकृष्ण शास्त्री के एक सो एक वर्ष  होने पर आयोजित सम्मान समारोह में सरस्वती सतपुड़ा  शिक्षा समिति  के अध्यक्ष अंबादास सूने ने व्यक्त किए। श्री सूने ने इस अवसर पर भारत के स्वतंत्रता संग्राम में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के योगदान पर प्रकाश डाला ।  देश की आजादी  मे  आजाद हिंद फौज एवं नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का महत्वपूर्ण स्थान है।  राधाकृष्ण शास्त्री ने 23 साल की उम्र में आजाद हिंद फौज में भर्ती होकर ब्रिटिश सरकार से देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी। शास्त्री जी शरणार्थी के रूप में बर्मा से भारत आकर पुनर्वास क्षेत्र के पहाड़पुर में बस गए। राधाकृष्ण शास्त्री जी आज भी पूरी तरह स्वस्थ और सक्रिय हैं। इससे पूर्व मंचस्थ अतिथियों ने नेताजी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और पुष्प अर्पित किए। इस मौके  पर राधाकृष्ण शास्त्री ने अपने संदेश में कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए असंख्य देशभक्तों ने बिना किसी अपेक्षा के अपना जीवन सहित सर्वस्व न्यौछावर कर दिया, हमें उनके बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने देना है। हर हाल में अपने देश को अखंड और स्वतंत्रता को सुरक्षित रखना प्रत्येक देशवासी का संकल्प होना चाहिए। इस अवसर पर द्वारा राधाकृष्ण शास्त्री को शाल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। इस मौके पर प्राचार्य राजेन्द्र तिवारी, गोरी शंकर ठाकुर सेवानिवृत्त राजस्व विभाग, अंबादास सूने, योगेन्द्र ठाकुर एवं अमित सिंह, अनय राज ठाकुर सहित अनेक लोग उपस्थित थे।

By Vishal

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