सारनी। सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी में 1975 के पूर्व 312॰5 मेगावाट का विधुत उत्पादन होता था। यह ईकाई अब डिसमेनटल की जा चुकी है। सारनी में भारत हेवीइलेक्ट्रिकल लिमिटेड ने 830 मेगावाट की 4  ईकाई को स्थापित किया। इन 4 ईकाईयो  से  भी 40  वर्षों से उत्पादन लिया जा रहा है।  2013 -14 मे 250 मेगावाट की 2 ईकाईयो  से उत्पादन शुरू हुआ। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने पहले दोरे  मे ही घोषणा की थी कि ईकाई 1 से 5 के डिसमेनटल के बाद 660 मेगावाट  क्षमता  की सुपर क्रिटिकल  ईकाई का निर्माण किया जाएगा । बैतुल एवं पाथाखेडा मे 2018 में भी कोयला खदान ओर  660 मेगावाट की ईकाई को स्थापित करने की घोषणा की थी। विद्युत मंडल कर्मचारी यूनियन के क्षेत्रीय महामंत्री अंबादास सूने ने बताया कि  संगठन  विगत 3 वर्षों से लगातार समय समय पर मध्यप्रदेश के  यशस्वी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह  चौहान के नाम सतपुड़ा ताप विद्युत गृह  सारनी एवं चचाई में 660 मेगावाट की ईकाई की स्थापना के लिए पत्र लिख रहा है।
आमला सारनी विधायक डाँक्टर योगेश पंडागरे को पुनः एक ज्ञापन सोपा  गया। सतपुड़ा ताप विद्युत गृह  सारनी में  कंपनी के पास मूलभूत सुविधाएँ पहले से ही उपलब्ध है। जिसके कारण सारनी मे 660 मेगावाट की ईकाई को स्थापित करने मे लागत में कमी होगी। इसी प्रकार अमरकंटक  ताप विद्युत गृह चचाई में भी 660 मेगावाट की ईकाई की स्थापना  करने मे लागत में कमी होगी, क्योंकि चचाई में दक्षिण पूर्व कोल इंडिया लिमिटेड की खदाने की दूरी भी कम है , कोयला सस्ता मिलेगा तो बिजली भी सस्ती मिलेगी। अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई   मे 210 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। चचाई एवं सारनी मे 660 मेगावाट की ईकाई को स्थापित करने के लिए मध्यप्रदेश शासन की ओर से प्रशासकीय स्वीकृति शीघ्र मिले। जिससे नये ताप विद्युत गृहों के निर्माण से मध्यप्रदेश पावर जनरेटिग कंपनी लिमिटेड  का भविष्य सुरक्षित होगा। इस मौके पर योगेन्द्र ठाकुर एवं यूनियन  की ओर से अनेक सदस्य उपस्थित थे।

By Vishal

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