सारनी। भारत सरकार द्वारा कोयला उद्योग में कमर्शियल माइनिंग के लिए निर्णय के विरोध में कोयला उद्योग के समस्त श्रमिको द्वारा शानदार तीन दिवसीय हड़ताल की गई।राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष डॉ कृष्णा मोदी आई.एम. डब्लयू. एफ. एवं राष्ट्रीय काउंसिल सदस्य एटक यूनियन सह पूर्व जेबीसीसीआई सदस्य ने बताया कीजिसे भारत के सभी श्रमिक संगठनों का भारी समर्थन मिला। सफल हड़ताल के बाद भी भारत सरकार संबंधित उद्योगों के श्रमिक नेताओ से अभी तक बातचीत नहीं की है । सभी जानते है कोई भी देश ऊर्जा रिजर्व के बिना सुपरपावर नहीं बन सकता।आज का भारत आत्मनिर्भरता की ओर बड़ते हुए स्वयं ही अपने महत्व आकांक्षी लक्ष्य 2024-25 तक 5 ट्रिलियन इकोनॉमी प्राप्त करने चल पड़ा है जिसमें कोयला उद्योग और अन्य सभी उद्योग अपनी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। 2016 से भारत सरकार की विशेषज्ञ समूह नीति आयोग द्वारा 40 सार्वजनिक उद्योगों में विनिवेश की सूची तैयार की गई थी जो आज कॉविड-19 महामारी की आड़ में अर्थ्यवस्था को मजबूत करने के बहाने सार्वजनिक उद्योगों जैसे रेलवे,पेट्रोलियम,बिजली,ऑयल एंड नेचुरल रिसोर्स सेक्टर,ऊर्जा, बी एच ई एल,परिवहन,बी एस एन अल,बैंक,बीमा आदि उद्योगों में दिन ब दिन विनिवेश किया जा रहा है साथ ही साथ 44 श्रम कानून के 4 कोड में संहिताकरण कर मजदूरों के मौलिक आधिकरो से खिलवाड़ कर पूंजीपतियों के हक में श्रम कानून बना रही है इसे देखते हुए श्रमिक संगठनों जिसमें बीएमएस शामिल नहीं है ने घोषणा की है कि हमारे देश ने साम्राज्यवादी अंग्रेज़ सरकार को भागने के लिए 9 अगस्त 1942 भारत छोड़ो आंदोलन में “करो या मरो” का नारा दिया था जिसे लेकर हर वर्ष भारत के नागरिक आजादी का जश्न मनाते है इस वर्ष सभी श्रमिक गण के संगठन 9 अगस्त 2020 को “देश बचाओ उद्योग बचाओ मजदूर बचाओ” की घोषणा करते हुए राष्ट्रव्यापी सत्याग्रह, जेल भरो आंदोलन, आदि के माध्यम से भारत छोड़ो आंदोलन को याद करेंगे । इसी के साथ भारत मे इस्पात,आंगनवाड़ी ,आशा सभी के कर्मचारी ने भी निर्णय लिया है कि 7 और 8 अगस्त 2020 को दो दिवसीय की हड़ताल करेंगे। 9 अगस्त 2020 को होने वाली राष्ट्रव्यापी आंदोलन को सफल बनाने के लिए देश के अंदर सभी संगठनों का संयुक्त मोर्चा बनाया है जिसमें बीएमएस शामिल नहीं है।संयुक्त मोर्चा द्वारा अपने अपने संगठनों को पत्र आदि भेजने की शुरू आत कर दी है और आशा है इसी तारतम्य में मध्य् प्रदेश एवं हमारे क्षेत्र के श्रमिक संगठन उक्त आंदोलन को सफल बनाएंगे ।