सारनी। पाथाखेड़ा क्षेत्र के विकास, समाजसेवा और राजनीति में अहम योगदान देने वाले स्वर्गीय श्री अवधेश सिंह जी के चतुर्थ पुण्य स्मरण के अवसर पर आगामी 4 अक्टूबर, रविवार को पाथाखेड़ा (प्रेम नगर) में एक विशाल निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर क्षेत्रवासी उनके द्वारा किए गए संघर्षों और निस्वार्थ समाजसेवा को याद कर रहे हैं।
बिहार से पाथाखेड़ा तक का संघर्षपूर्ण सफर
स्वर्गीय श्री अवधेश सिंह जी का जीवन कड़े संघर्ष और दृढ़ इच्छाशक्ति की एक मिसाल रहा है। साल 1970 के दशक में रोजगार की तलाश में वे बिहार से पाथाखेड़ा आए थे। शुरुआत में उन्होंने कई चुनौतियों का सामना किया, लेकिन अपनी कड़ी मेहनत से वे न केवल यहाँ स्थिर हुए, बल्कि व्यापार के क्षेत्र में भी नए मुकाम हासिल किए। उन्होंने अपने जीवनकाल में कई तरह के व्यवसाय किए और अपनी एक अलग पहचान बनाई।
लोगों को बसने में की मदद, क्षेत्र के लोकप्रिय ‘चाचा’
वे केवल अपने विकास तक सीमित नहीं रहे। अपनी आत्मीयता और हर किसी की मदद करने के स्वभाव के कारण वे लोगों के बीच इतने लोकप्रिय हो गए थे कि पूरा क्षेत्र उन्हें प्यार और सम्मान से ‘चाचा’ कहकर बुलाता था। उत्तर भारत से आए अनेक लोगों को पाथाखेड़ा में बसने और यहाँ एक नई शुरुआत करने में उन्होंने हर संभव मदद की। इतना ही नहीं, वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) में कई युवाओं और जरूरतमंदों को रोजगार दिलाने में ‘चाचा’ ने जो निस्वार्थ सहयोग किया, उसे यह क्षेत्र आज भी नहीं भूला है।
कड़क कुर्ता-पायजामा और बेबाक अंदाज
राजनीतिक और सामाजिक कार्यों में वे हमेशा अग्रणी रहे। उनका बेबाक अंदाज और हमेशा ‘कड़क सफेद कुर्ता-पायजामा’ पहने हुए उनकी प्रभावशाली शख्सियत पूरे बैतूल जिले में जानी जाती थी। वे एक ऐसे नेता थे, जिनका नाम और काम पूरे क्षेत्र में सम्मान के साथ लिया जाता था। कोई भी जरूरतमंद उनके दरवाजे से खाली हाथ नहीं लौटता था।
प्रकृति से गहरा लगाव और सादगी भरा जीवन
अपने कड़क और प्रभावशाली मिजाज के साथ-साथ, उनके भीतर एक बेहद सहज और प्रकृति प्रेमी इंसान भी बसता था। उन्हें पेड़-पौधों और हरियाली से गहरा लगाव था। अपने घर के पिछले हिस्से में उन्होंने बकायदा एक ‘बाड़ी’ (बगिया) बना रखी थी, जहाँ वे अक्सर अपने हाथों से पौधे लगाते और ताजी सब्जियां उगाया करते थे। ज़मीन और माटी से जुड़ा उनका यह सादगी भरा रूप उनके व्यक्तित्व को और भी खास बनाता था।
शिव मंदिर के जीर्णोद्धार में अहम भूमिका
अपने जीवन के अंतिम समय में भी वे सामाजिक और धार्मिक कार्यों से पूरे मन से जुड़े रहे। पाथाखेड़ा स्थित शिव मंदिर के उद्धार और विकास कार्यों में उनका अविस्मरणीय और सराहनीय योगदान रहा है।आज भले ही वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके द्वारा किए गए परोपकार के कार्य क्षेत्रवासियों के दिलों में जिंदा हैं। उन्हीं की स्मृतियों को ताजा करते हुए और उनके सेवाभाव को आगे बढ़ाते हुए, उनके परिवार (विक्की सिंह एवं समस्त परिवार) द्वारा 4 अक्टूबर को प्रेम नगर स्थित प्राथमिक विद्यालय के पास निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर लगाया जा रहा है। इस शिविर में नागपुर के प्रसिद्ध ‘लता मंगेशकर हॉस्पिटल’ के विशेषज्ञ डॉक्टर अपनी सेवाएं देंगे। परिवार ने समस्त क्षेत्रवासियों से इस शिविर का लाभ उठाने की अपील की है।