भोपाल। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम बढ़ा दिया है। यूसीसी का प्रारूप तैयार करने के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति ने अपना अंतिम प्रतिवेदन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सौंप दिया। अब इस रिपोर्ट के आधार पर तैयार किए गए विधेयक का विधि विभाग परीक्षण करेगा। इसके बाद कैबिनेट की मंजूरी मिलने पर इसे 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किए जाने की संभावना है। मुख्यमंत्री पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि प्रदेश में इसी वर्ष समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी।
यूसीसी का प्रारूप तैयार करने वालों का सीएम ने व्यक्त किया आभार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समय-सीमा के भीतर रिपोर्ट तैयार करने पर समिति के सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर समिति के सदस्य प्रो. गोपाल शर्मा, बुधपाल सिंह, शोभा पैठणकर और सदस्य सचिव अजय कटेसरिया उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने समिति की अध्यक्ष एवं सर्वोच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई, वरिष्ठ सलाहकार शत्रुघ्न सिंह तथा सदस्य अनूप नायर का भी विशेष रूप से धन्यवाद ज्ञापित किया, जो व्यक्तिगत कारणों से कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके।
तीन खंडों में सौंपा प्रतिवेदन
मुख्यमंत्री को सौंपा गया अंतिम प्रतिवेदन तीन अलग-अलग खंडों में तैयार किया गया है। पहले खंड में समिति की अनुशंसाएं शामिल हैं। इसमें अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर लागू विभिन्न कानूनों, प्रचलित व्यवस्थाओं और सामाजिक परंपराओं का विस्तृत अध्ययन करते हुए सुझाव दिए गए हैं। इस खंड को 10 अध्यायों में विभाजित किया गया है, जिसमें विभिन्न कानूनी और सामाजिक पहलुओं का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
इन कानूनों-नियमों से तैयार हुआ UCC का मसौदा
प्रतिवेदन का दूसरा खंड प्रस्तावित यूसीसी विधेयक के प्रारूप के रूप में तैयार किया गया है। समिति ने मध्य प्रदेश में वर्तमान में लागू कानूनों और नियमों को ध्यान में रखते हुए विधेयक का मसौदा तैयार किया है। प्रस्तावित विधेयक में चार भाग, 404 धाराएं और सात अनुसूचियां शामिल की गई हैं। माना जा रहा है कि विधेयक इन्हीं प्रावधानों के आधार पर विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा।
9.58 लाख से अधिक सुझाव और परामर्श मिले
रिपोर्ट के तीसरे खंड में जन परामर्श का विस्तृत विवरण शामिल है। समिति ने जिला स्तर, राज्य स्तर और ऑनलाइन माध्यम से व्यापक जनसुझाव अभियान चलाया था। इस प्रक्रिया के दौरान समिति को 9.58 लाख से अधिक सुझाव और परामर्श प्राप्त हुए। इन सुझावों का प्रश्नवार, लिंगवार और समुदायवार विश्लेषण भी रिपोर्ट में शामिल किया गया है, ताकि विभिन्न वर्गों की राय को नीति निर्माण में समाहित किया जा सके।
अनुसूचित जनजातियों को यूसीसी से बाहर रखने की अनुशंसा
जानकारी के अनुसार समिति ने अनुसूचित जनजातियों को समान नागरिक संहिता के दायरे से बाहर रखने की अनुशंसा की है। समिति का मानना है कि आदिवासी समुदायों की पारंपरिक सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्थाओं को यथावत बनाए रखा जाना चाहिए। राज्य सरकार द्वारा गठित इस उच्च स्तरीय समिति को विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे व्यक्तिगत एवं पारिवारिक विषयों से जुड़े मौजूदा कानूनों और व्यवस्थाओं का अध्ययन कर मध्य प्रदेश की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप यूसीसी का प्रारूप तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
मानसून सत्र में पेश किया जा सकता है यूसीसी बिल
समिति ने अपनी रिपोर्ट तैयार करते समय लैंगिक समानता सुनिश्चित करने, संविधान के मूल प्रावधानों का पालन करने, स्थानीय रीति-रिवाजों और सामाजिक परंपराओं का सम्मान बनाए रखने तथा विविध सांस्कृतिक और धार्मिक अनुष्ठानों को प्रभावित किए बिना संतुलित कानूनी व्यवस्था विकसित करने को अपना प्रमुख आधार बनाया है। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं, क्योंकि विधेयक को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किए जाने की संभावना है।
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