दतिया: नरोत्तम मिश्रा को बीजेपी ने दतिया उपचुनाव के लिए उम्मीदवार नहीं बनाया है। रेस में उनका नाम सबसे आगे था लेकिन अंतिम समय में आशुतोष तिवारी को टिकट दिया गया है। आशुतोष तिवारी पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे। वह मूलरूप से दतिया जिले के ही रहने वाले हैं और लंबे समय से संगठन में काम कर रहे हैं।
संघ की पसंद पर लगी मुहर
आशुतोष तिवारी दतिया के पुराने बीजेपी कार्यकर्ता हैं। छात्र जीवन से ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हैं। संगठन में विभिन्न पदों पर काम किया। नरोत्तम मिश्रा का टिकट नहीं मिलने का कारण माना जा रहा है कि संघ और पार्टी का प्रदेश नेतृत्व उनके नाम पर सहमत नहीं था। जिस कारण से बीजेपी ने नए चेहरे पर दांव लगाया है।
ब्राह्मण चेहरे की तलाश पूरी
नरोत्तम मिश्रा की जगह बीजेपी किसी ब्राह्मण चेहरे की तलाश में थी। क्षेत्र में नरोत्तम मिश्रा की छवि निगेटिव है। जिस कारण 2023 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे में बीजेपी नरोत्तम की जगह नए और बेदाग छवि के ब्राह्मण नेता को टिकट दिया। दतिया विधानसभा ब्राह्मण बाहुल्य सीट है। ऐसे में बीजेपी नरोत्तम की जगह नए चेहरे की तलाश में जुटी थी।
सीक्रेट सर्वे में निगेटिव रिपोर्ट
सूत्रों के मुताबिक, दतिया विधानसभा सीट रिक्त घोषित होने के बाद बीजेपी की एक विशेष केंद्रीय टीम फील्ड पर सर्वे कर रही थी। माना जा रहा है कि इस गोपनीय सर्वे रिपोर्ट में नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ एंटी-इंकंबेंसी की बात सामने आई थी। जिसके बाद बीजेपी ने चेहरा बदलने का फैसला किया। नरोत्तम मिश्रा दतिया विधानसभा उपचुनाव की तैयारियों में लगे थे और जनता से माफी मांग चुके थे।
नरोत्तम मिश्रा की नकारात्मक छवि
नरोत्तम मिश्रा दतिया विधानसभा सीट से पहले भी विधायक रह चुके हैं। क्षेत्र में नरोत्तम मिश्रा की छवि बेहद नकारात्मक है। जनता की नाराजगी नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ थी। नरोत्तम मिश्रा के बारे में कहा जाता था कि वह अपने क्षेत्र के लोगों से मिलते भी नहीं है। 2023 के विधानसभा चुनाव में अपनी नकारात्मक छवि के कारण ही उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
- नरोत्तम मिश्रा को बीजेपी ने नहीं दिया टिकट
- दतिया सीट से दावेदारी कर रहे थे नरोत्तम
- 2023 में इसी सीट से चुनाव हारे थे नरोत्तम मिश्रा
- निगेटिव फीडबैक के कारण नहीं मिला टिकट
विपक्ष को हमले का मौका नहीं दिया
सूत्रों के अनुसार, बीजेपी दतिया विधानसभा सीट से एक ऐसे उम्मीदवार की तलाश में थी जिसकी छवि बेदाग हो। जिस उम्मीदवार बनाने से कांग्रेस सीधा हमला उम्मीदवार की छवि पर नहीं कर सके। नरोत्तम मिश्रा को टिकट देने पर कांग्रेस उम्मीदवार को सहानूभूति वोट मिलने की आशंका था। इसी आशंका को देखते हुए बीजेपी ने यहां से नए चेहरे पर दांव लगाया है।
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